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Nepal: बिहार में चुनाव का हुआ एलान तो पड़ोसी नेपाल के चुनाव आयोग ने भी ले लिया बड़ा फैसला, जानिए क्या है अपडेट

Mon, 06 Oct 2025 10:52 PM IST
कुमार विवेक वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला, काठमांडू

सार

नेपाल के शीर्ष निर्वाचन निकाय ने सोमवार को प्रतिनिधि सभा चुनाव के कार्यक्रम को मंजूरी दे दी है। इस कार्यक्रम के अनुसार नेपाल में 5 मार्च चुनाव होने हैं। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं। 
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जेन जेड आंदोलन के बाद पीएम पद का शपथ लेतीं नेपाल की पीएम सुशीला कार्की। - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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भारत में चुनाव आयोग ने बिहार विधानसभा चुनावों का एलान कर दिया है। इस बीच, चुनाव पर बिहार से सटे नेपाल से भी बड़ी खबर सामने आई है। नेपाल के शीर्ष निर्वाचन निकाय ने सोमवार को प्रतिनिधि सभा चुनाव के कार्यक्रम को मंजूरी दे दी है। इस कार्यक्रम के अनुसार नेपाल में 5 मार्च चुनाव होने हैं। नेपाल में हाल ही में केपी शर्मा ओली सरकार को अपदस्थ करने के बाद पहली महिला पीएम सुशीला कार्की के नेतृत्व में कार्यवाहक सरकार कामकाज संभाल रही है।  

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एक बयान में नेपाल के चुनाव आयोग ने कहा कि जिस समय-सारिणी को अनुमोदित किया गया है उसमें पंजीकरण, मतदान और मतगणना सहित सभी प्रमुख प्रक्रियाओं के बारे में बताया गया है। कार्यक्रम के अनुसार, राजनीतिक दलों को 16 से 26 नवंबर तक चुनाव के लिए पंजीकरण कराना होगा। यदि कोई नया राजनीतिक दल चुनाव में भाग लेना चाहता है, तो उसे 15 नवंबर तक पंजीकरण कराना होगा।

राजनीतिक दलों को 15 फरवरी से 2 मार्च तक 15 दिनों की अवधि के लिए अपना चुनाव प्रचार अभियान चलाने की अनुमति होगी। इसमें कहा गया है कि पार्टियों को 2 और 3 जनवरी, 2026 को आनुपातिक चुनाव के लिए अपनी बंद सूची प्रस्तुत करनी होगी।
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मतदान 5 मार्च, 2026 को सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक होगा। मतपेटियों को एकत्रित करने के बाद उसी दिन मतगणना की जाएगी। आयोग ने कहा कि उसका लक्ष्य समय पर तैयारी और हितधारकों के बीच प्रभावी समन्वय के माध्यम से स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करना है। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने प्रतिनिधि सभा को भंग करके 12 सितंबर को नए चुनाव की तारीख की घोषणा की। अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की कहती रही हैं कि उनकी सरकार समय पर आम चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

73 वर्षीय कार्की 12 सितंबर को प्रधानमंत्री बनीं। इसके साथ ही प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को पद से हटाए जाने के बाद से चल रही राजनीतिक अनिश्चितता का दौर समाप्त हो गया था। भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के मुद्दे पर युवाओं के नेतृत्व वाले जेन जेड समूह ने ओली की सरकार के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन किया था।

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