नेपाल के सत्ताधारी गठबंधन में ‘सिद्धांत रूप में’ ये सहमति बनी है कि स्थानीय चुनाव तय समय पर कराए जाएंगे। लेकिन तमाम संकेत हैं कि इस मसले पर गठबंधन के भीतर अलग-अलग दलों के मतभेद दूर नहीं हुए हैं। इसीलिए सत्ताधारी गठबंधन ने निर्वाचन आयोग की तरफ से मतदान के लिए सुझाई गई तारीखों पर कुछ संवैधानिक सवाल उठा दिए हैं। निर्वाचन आयोग ने अप्रैल और मई में इस चुनावों को कराने का प्रस्ताव किया है।
सत्ताधारी गठबंधन ने कहा है कि स्थानीय चुनावों के मामले में संविधान और निर्वाचन कानून के प्रावधानों में अंतर है। ऐसे में गठबंधन संविधान के मुताबिक चलना पसंद करेगा। विश्लेषकों का कहना है कि गठबंधन के इस वक्तव्य का मतलब यही है कि वह स्थानीय चुनावों को सितंबर-अक्तूबर तक टालना चाहता है। सत्ताधारी गठबंधन में शामिल दोनों कम्युनिस्ट पार्टियां ये मांग करती रही हैं कि स्थानीय चुनाव को प्रांतीय और संघीय चुनाव के साथ ही कराया जाए। ये पार्टियां हैं- कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड सोशलिस्ट)।
उधर देश के मुख्य निर्वाचन आयुक्त दिनेश थपलिया ने कहा है कि निर्वाचन आयोग के अधिकारी बीते अक्तूबर में ही प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा से मिले थे। उन अधिकारियों ने प्रधानमंत्री को बता दिया था कि स्थानीय चुनाव मार्च कराने होंगे। थपलिया ने अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा- अगर कहा कि अगर संविधान और निर्वाचन अधिनियम में फर्क है, तो इसके लिए जिम्मेदार आयोग नहीं, बल्कि राजनीतिक दल हैं। अगर उनके मन में इनको लेकर कोई भ्रम है, तो वे प्रावधानों को बदल कर इसका समाधान निकाल सकते हैं।