Nepal Politics: पुष्प कमल दहाल के साथ नेपाल के पीएम शेर बहादुर देउबा
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नेपाल के सत्ताधारी गठबंधन ने अगले आम चुनाव में राजनीतिक स्थिरता को अपना प्रमुख मुद्दा बनाया है। गठबंधन ने कहा है कि वह संविधान की रक्षा करेगा और राजनीतिक स्थिरता प्रदान करेगा। गठबंधन ने इसे ही देश की समृद्धि का रास्ता बताया है।
सत्ताधारी गठबंधन में चार पार्टियां शामिल हैं। गठबंधन ने मंगलवार को मतदाताओं के लिए एक साझा अपील जारी की। इस अपील पर प्रधानमंत्री और नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) के अध्यक्ष पुष्प कमल दहल और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड सोशलिस्ट) के अध्यक्ष माधव कुमार नेपाल के दस्तखत हैं। इसमें वादा किया गया है कि गठबंधन स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए कृतसंकल्प है। बयान में यह वादा भी किया गया है कि सत्ताधारी गठबंधऩ में शामिल सभी पार्टियां चुनाव के बाद भी अपना सहयोग जारी रखेंगी।
मगर पर्यवेक्षकों ने ध्यान खींचा है कि इस बयान पर गठबंधन में शामिल एक अन्य दल राष्ट्रीय जनमोर्चा के नेता का दस्तखत नहीं है। इस आधार पर गठबंधन के अंदर अभी भी मतभेद कायम रहने के कयास लगाए गए हैं। जनता समाजवादी पार्टी पहले ही गठबंधन छोड़ चुकी है। उसने विपक्षी दल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) के साथ सीटों का तालमेल कर लिया है।
तीन नेताओं के दस्तखत से जारी साझा बयान में कहा गया है- ‘हम ऐसी स्थिति में हैं, जब संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य पर तानाशाही के हमले के खतरा बना हुआ है। जब तक संविधान के लिए प्रतिगामी ताकतों का खतरा बना रहेगा, तब तक मौजूदा गठबंधन का औचित्य कायम रहेगा।’
नेपाल में संसदीय और सात प्रांतों की असेंबलियों के लिए आम चुनाव 20 नवंबर को होगा। उस रोज संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा की प्रत्यक्ष निर्वाचन वाली 165 सीटों और प्रांतीय असेंबलियों की प्रत्यक्ष निर्वाचन वाली 330 सीटों के लिए वोट पड़ेंगे। चुनाव में सत्ताधारी गठबंधऩ का मुख्य मुकाबला पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली यूएमएल पार्टी के नेतृत्व में बने गठबंधन से है।
सत्ताधारी गठबंधन ने अपने बयान मे कहा है कि वह राष्ट्रवाद, बहुदलीय लोकतंत्र, समाजवाद, मानवाधिकारों, समय पर चुनाव, और संघीय ढंग की शासन प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए वचनबद्ध है। बयान में यह भी कहा गया है कि चुनाव प्रचार के दौरान गठबंधन में शामिल पार्टियों के नेता सातों प्रांतों में साझा रैलियों को संबोधित करेंगे। इन दलों ने पिछले मई में हुए स्थानीय चुनावों में एकजुट हिस्सा लिया था। तब उन्हें अच्छी कामयाबी मिली थी।
गठबंधन ने कहा है कि देश को आर्थिक समृद्धि के रास्ते पर ले जाने के लिए वह आत्म-निर्भर अर्थव्यवस्था के निर्माण को सर्वोच्च प्राथमिकता देगा। इसके तहत उत्पादन बढ़ाने पर जोर होगा, ताकि सबको रोजगार मुहैया कराया जा सके। उसकी अगली सरकार भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहनशीलता रखेगी और नागरिक सेवाओं को लोगों के दरवाजे तक पहुंचाने की योजना लागू की जाएगी। गठबंधन ने कृषि के आधुनिकीकरण का वादा भी किया है। लेकिन आलोचकों ने कहा है कि गठबंधन में शामिल दलों के पुराने रिकॉर्ड को देखते हुए उनके नए वादों पर लोग मुश्किल से ही भरोसा करेंगे।