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Nepal Politics: दहल के आरोप से उठा सवाल, नेपाल के चुनाव में किस विदेशी ताकत ने दिया दखल?

Thu, 15 Dec 2022 04:20 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो

सार

Nepal Politics: मीडिया टिप्पणियों में कहा गया है कि जब कभी दहल मुश्किल में फंसे, उन्होंने विदेशी ताकतों पर इल्जाम लगाने का तरीका अपनाया है। 2009 में जब उन्हें प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था, तब भी उन्होंने इसके लिए विदेशी शक्तियों को दोषी ठहराया था...
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Nepal Politics: Pushp Kamal Dahal - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (माओइस्ट सेंटर) के नेता पुष्प कमल दहल ने हाल में हुए आम चुनाव में विदेशी हस्तक्षेप का आरोप लगा कर यहां एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस आरोप से सुरक्षा विशेषज्ञ खास नाराज हैं। उन्होंने कहा है कि बिना सबूत दिए ऐसे आरोप लगाना लोकतंत्र के हित में नहीं है।

नेपाली सेना से रिटायर्ड मेजर जनरल बिनोज बसनेत ने कहा है- ‘अगर किसी विदेशी शक्ति ने हस्तक्षेप किया, तो दहल उस स्थिति में हैं, जहां से वे जांच कराने की पहल कर सकते हैं। अगर कोई अधिकार-संपन्न व्यक्ति आरोप लगता है, तो लोग चाहते हैं कि वह साक्ष्य भी दे। अगर दहल ऐसा नहीं करते हैं, तो फिर इस आरोप को चुनाव में अपनी पार्टी की नाकामी से ध्यान हटाने का हथकंडा ही माना जाएगा।’

दहल ने ललितपुर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए आम चुनाव में विदेशी हस्तक्षेप का इल्जाम लगाया। उन्होंने ये बात उस समय कही, जब नेपाल में नई सरकार बनने की प्रक्रिया चल रही है और विभिन्न देशों के राजनयिक इसमें गहरी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। नेपाल में आम चुनाव के लिए मतदान बीते 20 नवंबर को हुआ था। उसमें माओइस्ट सेंटर को काफी नुकसान हुआ। संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा में पहले उसके 53 सदस्य थे, जबकि इस बार उसे 32 सीटें ही मिली हैं। इससे पार्टी के अंदर कुछ हलकों से दहल के नेतृत्व पर सवाल उठाए गए हैं।

पर्यवेक्षकों के मुताबिक यह पहला मौका नहीं है, जब दहल ने विदेशी ताकतों पर इल्जाम मढ़ा हो। मीडिया टिप्पणियों में कहा गया है कि जब कभी दहल मुश्किल में फंसे, उन्होंने विदेशी ताकतों पर इल्जाम लगाने का तरीका अपनाया है। 2009 में जब उन्हें प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था, तब भी उन्होंने इसके लिए विदेशी शक्तियों को दोषी ठहराया था। दहल के इस्तीफे के बाद माधव कुमार नेपाल के नेतृत्व में सरकार बनी थी। तब दहल ने उसे विदेशी हाथों की कठपुतली बताते हुए उसके खिलाफ मुहिम छेड़ दी थी।

माओइस्ट सेंटर के एक पदाधिकारी ने नाम ना छापने की शर्त पर अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा है- ‘अपनी नाकामियों के लिए दूसरों को दोषी ठहराना दहल की आदत रही है।’ इस बार भी दहल ने यह आरोप लगाते हुए कोई साक्ष्य पेश नहीं किया। उन्होंने कहा- ‘हम 2008 से चुनावों में हिस्सा लेते रहे हैं, लेकिन हमने इसके पहले कभी इस स्तर पर विदेशी हस्तक्षेप नहीं देखा। इस बार विदेशी ताकतों ने बड़ी सावधानी से तय किया कि किसे चुनना है और किसे हटाना है।’ उन्होंने कहा- ‘हालांकि यह गंभीर मसला है, लेकिन इसके विस्तार में मैं नहीं जाऊंगा।’

माओइस्ट सेंटर के महासचिव देव गुरुंग ने भी दहल की बात का समर्थन किया है। उन्होंने काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘किसी राजनीतिक पार्टी के विकसित होने में समय लगता है। नई पार्टियों का तुरंत उदय बिना विदेशी हस्तक्षेप के संभव नहीं होता।’ उनका इशारा इस चुनाव में उभरी दो नई पार्टियों- राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी और जनमत पार्टी की तरफ था।

लेकिन विशेषज्ञों ने इन आरोपों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। नेपाल के विदेश मंत्रालय में पूर्व प्रोटोकॉल अधिकारी मोहन कृष्ण श्रेष्ठ ने कहा है- ‘अगर यह स्थिति है, तो क्या सरकार को इसकी जानकारी थी? अगर हां, तो उसने इसके खिलाफ कदम क्यों नहीं उठाए? अगर सरकार के पास विदेशी हस्तक्षेप के सबूत हैं, तो उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए।’ गौरतलब है कि माओइस्ट सेंटर सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा है।

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