Nepal Politics: Pushp Kamal Dahal
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नेपाल में राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने नई सरकार के गठन की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू कर दी है। उन्होंने राजनीतिक दलों से अपना दावा पेश करने को कहा है। पार्टियों से कहा गया है कि अपने पक्ष में बहुमत का समर्थन होने का दावा वे 25 दिसंबर तक पेश कर दें। राष्ट्रपति भवन ने कहा है कि विद्या देवी भंडारी सरकार गठन में देर करने के पक्ष में नहीं हैं। सूत्रों ने कहा कि किसी दल या गठबंधन की तरफ से सरकार बनाने का दावा पेश नहीं किए जाने के कारण राष्ट्रपति को अपनी तरफ से सरकार गठन की पहल करनी पड़ी।
नेपाल में हुए संसदीय आम चुनाव में किसी पार्टी या गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। 275 सदस्यों वाली प्रतिनिधि सभा में पूर्ण बहुमत के लिए 138 सीटें चाहिए। लेकिन नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व वाला सत्ताधारी गठबंधन 136 सीटें ही जीत पाया। इसके बावजूद फिलहाल इस गठबंधन की ही सरकार बनने की संभावना सबसे ज्यादा मजबूत है। लेकिन इस नई सरकार का नेतृत्व कौन करेगा, इस अहम सवाल पर अभी तक इस गठबंधन में सहमति नहीं बन पाई है।
अब इस बात के ठोस संकेत हैं कि सत्ताधारी गठबंधन के अंदर प्रधानमंत्री और नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) के अध्यक्ष पुष्प कमल दहल के बीच नेता पद को लेकर जबरदस्त खींचतान चल रही है। दोनों में इस बात पर सहमति है कि वे पांच साल के कार्यकाल में आधे-आधे समय तक प्रधानमंत्री रहेंगे। लेकिन पहले प्रधानमंत्री कौन बनेगा, इसको लेकर विवाद बढ़ गया है।
अखबार काठमांडू पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक दहल ने शनिवार को देउबा से मुलाकात की थी। उस दौरान उन्होंने पहले प्रधानमंत्री बनने का अपना दावा औपचारिक रूप से जता दिया। इस बात की पुष्टि नेपाली कांग्रेस के प्रवक्ता प्रकाश शरण महत ने की है। उन्होंने कहा- शनिवार की मुलाकात में दहल ने औपचारिक रूप से नेपाली कांग्रेस का समर्थन मांगा, ताकि वे पहले प्रधानमंत्री बन सकें। महत ने कहा- ‘दहल की तरफ से ऐसा प्रस्ताव आने की अपेक्षा थी। लेकिन चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने के कारण यह स्वाभाविक है कि नेपाली कांग्रेस पहले सरकार का नेतृत्व करे।’
नेपाली कांग्रेस के सूत्रों ने मीडियाकर्मियों को बताया है कि दहल के प्रस्ताव पर देउबा ने उन्हें कोई ठोस जवाब नहीं दिया। सूत्रों ने कहा कि अभी भी देउबा ही अगला प्रधानमंत्री बनने की होड़ में सबसे आगे हैं। अगर देउबा फिर से प्रधानमंत्री बने, तो इस पद पर यह उनका छठा कार्यकाल होगा। लेकिन देउबा के लिए चुनौती सिर्फ दहल ही नहीं हैं। बल्कि खुद उनकी अपनी पार्टी के कई नेता भी इस होड़ में शामिल हैं।
हालांकि माओइस्ट सेंटर को हाल के आम चुनाव में सिर्फ 32 संसदीय सीटें मिली हैं, इसके बावजूद प्रधानमंत्री बनने की उनकी महत्त्वाकांक्षा विपक्षी दल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) के रुख से बढ़ी है। सूत्रों के मुताबिक यूएमएल ने उनके सामने प्रस्ताव रखा है कि अगर वे सत्ताधारी गठबंधन छोड़ दें, तो वह प्रधानमंत्री पद पर उनकी दावेदारी का समर्थन कर सकती है। नेपाली कांग्रेस के एक नेता ने काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘माओइस्ट सेंटर के कुछ नेता यूएमएल के साथ लगातार संपर्क में हैं। उनका मकसद दहल को प्रधानमंत्री बनाने के लिए सत्ताधारी गठबंधन की अन्य पार्टियों पर दबाव बनाना है।’