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Nepal Politics: अब खतरे में है देउबा का सियासी करियर, पार्टी के अंदर बढ़ रहा है दबाव

Thu, 26 Jan 2023 06:05 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो

सार

Nepal Politics: राजनीतिक पर्यवेक्षकों के मुताबिक अगर राष्ट्रपति चुनाव में देउबा नेपाली कांग्रेस को नहीं दिलवा पाए, तो पार्टी के अंदर उनका प्रभाव बेहद घट जाएगा। उस हाल में उनके हाथ से पार्टी अध्यक्ष पद निकल सकता है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक देउबा के लिए विडंबना भरी स्थिति पैदा हो गई है...
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Nepal Politics: शेर बहादुर देउबा और केपी शर्मा ओली - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा का राजनीतिक भविष्य दांव पर है। पिछले आम चुनाव में नेपाली कांग्रेस के सबसे बड़े दल के रूप में उभरने के बावजूद देउबा सरकार बनाने में नाकाम रहे। उसके बाद वे दूसरे दलों से ऐसा तालमेल भी नहीं बना पाए, जिससे प्रतिनिधि सभा (संसद का निचला सदन) के स्पीकर या डिप्टी स्पीकर में से कोई एक पद नेपाली कांग्रेस को मिल सके। अब पार्टी के अंदर उन पर इस बात का दबाव बढ़ गया है कि वे किसी तरह राष्ट्रपति पद पार्टी को दिलवाना तय करें।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों के मुताबिक अगर राष्ट्रपति चुनाव में देउबा नेपाली कांग्रेस को नहीं दिलवा पाए, तो पार्टी के अंदर उनका प्रभाव बेहद घट जाएगा। उस हाल में उनके हाथ से पार्टी अध्यक्ष पद निकल सकता है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक देउबा के लिए विडंबना भरी स्थिति पैदा हो गई है। एक तरफ यह सच है कि उनके नेतृत्व में पार्टी प्रतिनिधि सभा में सबसे बड़ा दल बन कर उभरी। 2017 के चुनाव में नेपाली कांग्रेस को प्रत्यक्ष निर्वाचन वाली सिर्फ 23 सीटें मिली थीं। जबकि 2022 में उसे 57 ऐसी सीटें मिलीं।

लेकिन चुनाव जीतने के बाद देउबा अपनी गोटियां ठीक से नहीं खेल सके। इस वजह से नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व वाला गठबंधन बिखर गया। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) के नेता पुष्प कमल दहल विपक्षी खेमे से जा मिले और अब वे देश के प्रधानमंत्री हैं। इस राजनीतिक घटनाक्रम का परिणाम यह हुआ कि सातों प्रांतों की सत्ता भी नेपाली कांग्रेस के हाथ से निकल गई।

सरकार बनाने में नाकामी के बाद देउबा ने एक और सियासी गलती की। पुष्प कमल दहल सरकार के विश्वास मत पर मतदान के दौरान उन्होंने उसका समर्थन कर दिया। उससे यह भ्रम फैल गया कि क्या नेपाली कांग्रेस सचमुच विपक्ष की भूमिका निभा रही है। इसी पृष्ठभूमि में राष्ट्रपति के चुनाव को टर्निंग प्वाइंट बताया जा रहा है।

नेपाली कांग्रेस के नेता शंकर तिवारी ने कहा है- ‘राष्ट्रपति का चुनाव देउबा के लिए लिटमस टेस्ट साबित होगा। अगर उस चुनाव में पार्टी को नाकामी हाथ लगी, तो पार्टी के अंदर देउबा के रसूख में सेंध लग जाएगी।’ 76 वर्षीय देउबा पिछले साल नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए थे। लेकिन मौजूदा हाल में अब उनके इस पद पर बने रहने को लेकर संदेह जताए जा रहे हैं।

इसे देखते हुए देउबा ने राष्ट्रपति पद नेपाली कांग्रेस को दिलवाने के लिए माओइस्ट सेंटर और विपक्षी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) से संपर्क साधा है। सोमवार को उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की थी। उसमें तय हुआ था कि राष्ट्रपति पद के लिए नेपाली कांग्रेस अपना दावा पेश करे।

सूत्रों के मुताबिक देउबा की कोशिश कि अगर नेपाली कांग्रेस का उम्मीदवार जीतने की स्थिति में ना हो, तो किसी तटस्थ उम्मीदवार पर आम सहमति बनाई जाए। समझा जाता है कि अगर उनकी यह कोशिश कामयाब हुई, तो पार्टी के अंदर अपने किले को बचाने में वे सफल हो सकते हैं। लेकिन सत्ताधारी गठबंधन में शामिल दल इसके लिए राजी होंगे, इसकी संभावना कम है। उनके बीच पहले ही यह सहमति बन चुकी है कि राष्ट्रपति का पद यूएमएल को दिया जाएगा।

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