Nepal Politics: Pushpa Kamal Dahal and KP Sharma Oli
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राष्ट्रपति चुनाव के उम्मीदवार को लेकर सत्ताधारी गठबंधन की दो सबसे बड़ी पार्टियों के बीच चौड़ी होती दरार के कारण नेपाल में राजनीतिक अनिश्चय गहरा गया है। प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल की सरकार के गिरने की चर्चा अब जोर पकड़ गई है। विपक्षी नेपाली कांग्रेस के महासचिव गगन थापा ने यह बयान देकर जारी अनिश्चय को और बढ़ा दिया है कि दहल सरकार 22 फरवरी तक गिर जाएगी।
सत्ताधारी गठबंधन से जुड़े सूत्रों के मुताबिक अगले राष्ट्रपति के नाम पर दहल की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) और पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) के बीच मतभेद लगातार बने हुए हैं। दहल अगले राष्ट्रपति को लेकर नए सिरे से आम सहमति तैयार करने पर जोर दे रहे हैं, जबकि यूएमएल उनसे पिछले 25 दिसंबर को बनी सहमति पर कायम रहने को कह रही है। 25 दिसंबर को नया सत्ताधारी गठबंधन बना था। तब तय हुआ था कि राष्ट्रपति का पद यूएमएल को मिलेगा।
गगन थापा ने हाल में दहल से मुलाकात की थी। इसीलिए उनके बयान को गंभीरता से लिया गया है। दहल ने नेपाली कांग्रेस की एक सभा में कहा- ’25 दिसंबर को बनी सहमति अगले 23 फरवरी को टूट जाएगी।’ उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार जनादेश का उल्लंघन करके बनाई गई थी और इसका टूटना तय है। थापा ने यह भी दावा किया कि मौजूदा सत्ताधारी गठबंधन के बिखरने के बाद नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व वाला पुराना गठबंधन फिर से कायम होगा, जिसके हिस्से के तौर पर माओइस्ट सेंटर ने आम चुनाव लड़ा था।
थापा के एक करीबी नेता अखबार काठमांडू पोस्ट से बातचीत में कहा कि गगन थापा कोई भी बात हलके से नहीं कहते। नेपाली कांग्रेस के एक अन्य नेता शंकर तिवारी ने कहा है- दहल पूरे पांच साल प्रधानमंत्री रहना चाहते हैं। लेकिन अगर वे ओली के साथ टिके रहे, तो ढाई साल में ही उनकी पार्टी अपना सब कुछ गंवा देगी। तिवारी ने कहा- ‘इसलिए माओइस्ट सेंटर राष्ट्रपति चुनाव यूएमएल के उम्मीदवार के खिलाफ वोट देगी और उसके साथ ही मौजूदा गठबंधन टूट जाएगा।’
उधर माओइस्ट सेंटर के नेता दावा कर रहे हैं कि दहल ऐसी आम सहमति तैयार करने में सफल हो जाएंगे, जिससे राष्ट्रपति चुनाव में नेपाली कांग्रेस और यूएमल दोनों किसी एक ही उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करेंगे। पार्टी के नेता मनहरि तिमिलसिना ने कहा है कि प्रधानमंत्री इन दोनों पार्टियों को साथ लेकर सरकार चलाना चाहते हैं। माओइस्ट सेंटर के नेताओं का दावा है कि 25 दिसंबर को बनी सहमति उस रोज अप्रासंगिक हो गई, जब दहल सरकार के विश्वास मत पर मतदान के समय नेपाली कांग्रेस ने भी उसके पक्ष में वोट डाला।
राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान अगले नौ मार्च होगा। उम्मीदवारों के लिए पर्चा दाखिल करने की आखिरी तारीख आने में अब सिर्फ नौ दिन बचे हैं। इसलिए चुनाव की सरगर्मी तेज होती जा रही है। इस बीच माइओस्ट सेंटर और यूएमएल के अपने-अपने रुख पर अड़े रहने से तमाम तरह के कयासों को बल मिला है।