Nepal Politics: Pushp Kamal Dahal, KP sharma OLI
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Nepal Politics: कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) के नेता पुष्प कमल दहल ने पलटी खाने की अपनी बहुचर्चित कला का परिचय देते हुए फिर से प्रधानमंत्री बनने का समीकरण बना लिया है। 275 सदस्यों के सदन में 169 सदस्यों का समर्थन जुटा कर अपनी नई सरकार के लिए भारी बहुमत का इंतजाम भी उन्होंने कर लिया है। लेकिन इस समय देश जिस आर्थिक संकट में है, उसे संभावना उनकी सरकार के लिए आसान नहीं होगा।
नई सरकार बनने के मौके पर उद्योगपतियों और व्यापारियों के संगठन फेडरेशन ऑफ नेपालीज चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एफएनसीसीआई) ने ‘सेव द इकोनॉमी’ यानी अर्थव्यवस्था बचाओ अभियान की शुरुआत की है। उद्योगपतियों की शिकायत है कि देश में वस्तुओँ और सेवाओं का उपभोग तेजी से घटा है, जिस कारण उन्हें अपने उत्पादन में कटौती करनी पड़ी है। इस वजह से कई फैक्टरियों को अपनी क्षमता के मुताबिक चलाना संभव नहीं हो रहा है।
एफएनसीसीआई के मुताबिक फैक्टरियों में गतिविधियां धीमी होने के कारण बिजली की मांग घट गई है। इसका असर बिजली उत्पादन संयंत्रों पर पड़ रहा है। एफएनसीसीआई के अध्यक्ष शेखर गोलछा ने एक बयान में कहा- ‘औद्योगिक गतिविधियां 60 से 70 फीसदी घट गई हैं। मांग में 70 से 80 फीसदी तक की गिरावट आई है। मुद्रास्फीति ऊंचे स्तर पर है, जबकि देश में नकदी का अभाव बना हुआ है। इन सब कारणों से देश मंदी की तरफ जा रहा है।’
जिस समय देश के सामने ऐसी गंभीर चुनौती है, देश में एक ऐसी सरकार बनने जा रही है, जो अनेक दलों के समर्थन पर निर्भर होगी। सरकार का नेतृत्व दहल करेंगे, जबकि उनकी पार्टी के पास संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा में सिर्फ 32 सीटें हैं। नए बने सत्ताधारी गठबंधन में 78 सीटों के साथ सबसे बड़ा दल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) है। ऐसे में जाहिर है कि सत्ता की असली कमान इस पार्टी के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के हाथ में होगी। इससे सरकार के टकराव की आशंका बनी रहेगी।
नई सरकार बनने के बावजूद राजनीतिक अस्थिरता का माहौल कायम रहने की आशंका जताते हुए त्रिभुवन विश्वविद्यालय में राजनीतिक शास्त्र विभाग के प्रमुख रामकृष्ण त्रिपाठी ने अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘ऐसे गठबंधन कभी भी टूट सकते हैं। सरकार में शामिल एक भी दल नाराज हुआ, तो अस्थिरता बढ़ जाएगी।’
शेखर गोलछा ने कहा- ‘नई सरकार बनने से मौजूदा आर्थिक समस्याओं को हल करने में मदद मिल सकती है। लेकिन हमें आशंका इसकी स्थिरता को लेकर है। राजनीतिक अस्थिरता का मतलब होता है भ्रष्टाचार बढ़ना, जिससे निवेशक हतोत्साहित होते हैं।’
पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया गया है कि अतीत में राजनीतिक अस्थिरता के कारण नेपाल को काफी नुकसान उठाना पड़ा। सरकार का नेतृत्व बदलने के साथ सरकार की नीति बदल जाती है, जिसका कारोबारी माहौल पर बहुत खराब असर होता है। नेशनल प्लानिंग कमीशन के पूर्व संयुक्त सचिव पुष्प लाल शाक्य ने काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘राजनेताओं में यह प्रवृति होती है कि सरकार बदलने के साथ वे नौकरशाही में बड़े बदलाव लाते हैं। उसका असर परियोजनाओं को लागू करने पर पड़ता है।’ रविवार को नाटकीय ढंग से घटी सियासी घटनाओं ने इस तरह की अस्थिरता को लेकर नेपाल में चिंता बढ़ा दी है।