Nepal Politics: पुष्प कमल दहल के साथ शेर बहादुर देउबा
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Nepal Politics: नेपाल में सत्ता हाथ से निकल जाने के बाद नेपाली कांग्रेस में उथल-पुथल शुरू हो गई है। पूर्व प्रधानमंत्री और नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा को सवालों के कठघरे में खड़ा किया जा रहा है। पूर्व सत्ताधारी गठबंधन को ना बचा पाने का सारा ठीकरा अब देउबा के माथे ही फोड़ा जा रहा है।
रविवार सुबह तक यह आम समझ थी कि नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व में पांच दलों का गठबंधन सरकार बनाने जा रहा है। लेकिन दोपहर को हुई गठबंधन की बैठक में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) को नेता पुष्प कमल दहल ने अलग होने का फैसला सुना दिया। दहल लगातार यह मांग कर रहे थे कि उस गठबंधन की नई सरकार में पहले ढाई साल तक उन्हें प्रधानमंत्री बनने दिया जाए। लेकिन देउबा खुद प्रधानमंत्री बनने पर अड़े हुए थे।
अब यह साफ है कि दहल ने नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन में रहते हुए भी पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और दूसरे विपक्षी नेताओं के साथ तार जोड़ रखे थे। इसलिए नेपाली कांग्रेस के कई नेता आरोप लगा रहे हैं कि देउबा इस घटनाक्रम से नावाकिफ रहे और दहल को विपक्षी खेमे में जाने से रोकने में नाकाम रहे। ओली की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) और कई दूसरे दलों के समर्थन से अब दहल प्रधानमंत्री बन गए हैं। जिन दलों ने उन्हें समर्थन दिया है, उनमें राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी, राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी, नागरिक उन्मुक्ति पार्टी, जनमत पार्टी, और जनता समाजवादी पार्टी शामिल हैं। साथ ही कुछ निर्दलीय सांसदों ने भी उन्हें अपना समर्थन दिया है।
आम चुनाव में सबसे बड़े दल के रूप में उभरने के बावजूद सरकार बनाने में नेपाली कांग्रेस की नाकामी के लिए पार्टी नेता देउबा और उनके करीबी लोगों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। जो लोग घेरे में हैं, उनमें देउबा की पत्नी आरजू देउबा राना, ज्ञानेंद्र बहादुर कारकी, बिमलेंद्र निधि और पार्टी प्रवक्ता प्रकाश शरण महत भी शामिल हैं। इन लोगों पर आरोप है कि उन्होंने देउबा को गलत सलाह दी। उनकी बातों में आकर देउबा ने गलत रणनीति अपनाई, जिस कारण अब नेपाली कांग्रेस को विपक्ष में बैठना पड़ेगा।
अब कुछ पार्टी नेताओं ने मांग की है कि देउबा पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दें। उन्होंने पार्टी की सेंट्रल कमेटी की बैठक तुरंत बुलाने की मांग भी की है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक नेपाली कांग्रेस में एक मजबूत धड़ा पहले से देउबा को घेरने की फिराक में था। अब उसे मौका मिल गया है। पूर्व राजदूत और राजनीतिक विश्लेषक लोकराज बराल ने अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘संसद में सबसे बड़ा दल होने के बावजूद नेपाली कांग्रेस ने सत्ता गंवा दी है। इसके लिए पार्टी नेतृत्व ही पूरी तरह जिम्मेदार है।’
बराल ने कहा- ‘जब गठबंधन में शामिल दलों ने सत्ता में ज्यादा हिस्सा मांगा, तो देउबा गुट स्थिति का सही आकलन करने और आगे की घटनाओं का अंदाजा लगा पाने में नाकाम रहा। इसलिए नेपाली कांग्रेस की मौजूदा दुर्दशा के लिए वही जिम्मेदार है।’ नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शेखर कोइराला पहले से देउबा का विरोध कर रहे थे। ताजा घटनाक्रम के बाद उन्होंने कहा- ‘नई स्थिति में गंभीर सवाल उठे हैं। देउबा के नेतृत्व में गठबंधन कारगर क्यों साबित नहीं हुआ, इस सवाल का जवाब हम सबको ढूंढना होगा।’ कोइराला गुट के नेता गुरुराज घिमिरे ने कहा है- ‘अब देउबा को पार्टी अध्यक्ष और संसदीय दल के नेता- दोनों पदों से नैतिक आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए।’