नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा ने संघीय मंत्रिमंडल में फेरबदल करवाने की सहयोगी दलों की मंशा पर पानी फेर दिया है। इससे सत्ताधारी गठबंधन में शामिल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड सोशलिस्ट) के साथ देउबा की पार्टी नेपाली कांग्रेस के रिश्तों में नया पेच पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक मंत्रिमंडल में शामिल यूनिफाइड सोशलिस्ट के कुछ मंत्रियों से देउबा के करीबी रिश्ते बन गए हैं। बताया जाता है कि उन मंत्रियों ने अपनी ही पार्टी की मांग को ठुकराने के लिए देउबा पर दबाव बनाया। देउबा भी अभी मंत्रिमंडल में कोई बदलाव नहीं चाहते हैं। नेपाली कांग्रेस की राय है कि अभी जबकि सरकार के अंदर अगले बजट पर विचार-विमर्श हो रहा है, तो मंत्रियों को बदलने से जनता में अच्छा संदेश नहीं जाएगा।
बताया जाता है कि सत्ताधारी गठबंधन में शामिल कुछ दूसरे दलों ने भी फेरबदल का विरोध किया। देउबा ने सोमवार को कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) के अध्यक्ष पुष्प कमल दहल, जनता समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष उपेंद्र यादव और माधव कुमार नेपाल से बातचीत की। बाद में यादव ने पत्रकारों से कहा- ‘हमने कहा कि फेरबदल की बात अभी टाल दी जानी चाहिए। अभी जबकि बजट को संसद की मंजूरी नहीं मिली है, मंत्रियों को कैसे बदला जा सकता है।’
अखबार काठमांडू पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक खुद नेपाली कांग्रेस के अंदर भी मंत्री बनने की महत्त्वाकांक्षा रखने वाले नेता मंत्रिमंडल में फेरबदल की वकालत कर रहे हैं। पार्टी के महासचिव गगन थापा ने ये बात स्वीकार की है। उन्होंने कहा- ‘कुछ लोग नए चेहरों को मौका देने की बात कर रहे हैं। उधर जो लोग मंत्री हैं, वे कह रहे हैं कि उन्हें अपना काम दिखाने का मौका दिया जाना चाहिए। अब इस बारे में फैसला देउबा को करना है, क्योंकि इस सरकार का कार्यकाल अब ज्यादा लंबा नहीं बचा है।’
पर्यवेक्षकों का कहना है कि अगर देउबा ने मंत्रिमंडल में फेरबदल नहीं किया, तो गठबंधन के अंदर विवाद खड़ा होना तय है। माधव कुमार नेपाल पहले से इस बात को लेकर नाराज हैं कि हाल के स्थानीय चुनावों में गठबंधन सहयोगियों ने उनकी पार्टी की मदद नही की। अब फेरबदल की उनकी मांग भी नहीं मानी गई, तो संभव है कि वे अपने लिए नया रास्ता तलाशें।