अमेरिका और चीन के बीच दुनिया में चल रही होड़ अब ऐसा लगता है कि पर्वतारोहण तक पहुंच गई है। इस सीजन में दुनिया की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट पर चढ़ने के लिए रिकॉर्ड संख्या में अमेरिकी और चीनी पर्वतारोहियों ने अर्जी दी है। एवरेस्ट पर चढ़ने के लिए नेपाल के पर्यटन विभाग से पूर्व अनुमति लेनी होती है। इस वर्ष अब तक वह 96 चीनी पर्वतारोहियों और 87 अमेरिकी पर्वतारोहियों को नेपाल एवरेस्ट पर चढ़ने की इजाजत दे चुका है।
इस बार वैसे भी एवरेस्ट पर चढ़ने के इच्छुक पर्वतारोहियों की संख्या का रिकॉर्ड बना है। बीते सप्ताहांत तक 454 पर्वतारोहियों को इसके लिए परमिट जारी किया जा चुका था। अधिकारियों ने कहा है कि यह संख्या इस बार 500 को पार कर जाएगी। अब तक जिन पर्वतारोहियों को परमिट मिल चुके हैं, उनमें 40 भारत के, 21 कनाडा के और 19 रूस के हैँ।
नेपाल माउंटनियरिंग एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष आंग त्सेरिंग शेरपा ने अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘परंपरागत रूप से पर्वतारोहण या ट्रेकिंग जैसी एडवेंचर गतिविधियों में अमेरिकी अधिक संख्या में आते रहे हैं। लेकिन इस बार सूरत अलग रह सकती है। चीन ने अपने नागरिकों के लिए सीमा खोल दी है और ऐसा लग रहा है कि इस बार अमेरिकियों से ज्यादा चीनी पर्वतारोही एवरेस्ट पर चढ़ने की कोशिश करेंगे।’
जानकारों के मुताबिक चीनी पर्वतारोही कई कारणों से नेपाल की तरफ से एवरेस्ट पर चढ़ने की कोशिश करते हैं। उनमें एक कारण यह है कि इधर से चढ़ने में उन्हें कम दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। नेपाल की सबसे बड़ी पर्वतारोहण आयोजक संस्था सेवेन समिट ट्रेक्स के अध्यक्ष मिंगमा शेरपा के मुताबिक चीन ने अपने पर्वतारोहियों के लिए एक नया नियम लागू किया है। इसके तहत उन्हें एवरेस्ट पर चढ़ने की कोशिश करने के पहले आठ हजार मीटर की ऊंचाई वाली चोटी तक चढ़ना पड़ता है। यह नियम कोरोना महामारी के बाद लागू किया गया है। मिंगमा शेरपा ने बताया कि यह नियम लागू होने के बाद नेपाल आने वाले चीनी पर्वतारोहियों की संख्या में तेजी से उछाल आया है।
इस वर्ष 15 मार्च को चीन ने तीन साल की पाबंदी हटाते हुए अपने नागरिकों को नेपाल की यात्रा करने की इजाजत दे दी। लेकिन उसने अपने इलाके की ओर से विदेशियों के एवरेस्ट पर चढ़ाई की कोशिश पर लगातार चौथे साल भी प्रतिबंध लगा रखा है। पर्वतारोहण की सेवा देने वाली कंपनियों का अनुमान है कि इस वर्ष 500 से अधिक पर्वतारोही एवरेस्ट पर चढ़ने की कोशिश करेंगे। पर्वतारोण का सीजन मई के दूसरे सप्ताह में शुरू होगा। नियमों के मुताबिक हर पर्वतारोही को अपने साथ गाइड के रूप में एक शेरपा को ले जाना होता है।
इस तरह अगर सभी पर्वतारोही एवरेस्ट पर पहुंचने में सफल रहे, तो उसका मतलब होगा कि इस वर्ष एक हजार लोग दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर पहुंचेंगे। वैसे अधिकारियों के मुताबिक एवरेस्ट अभियानों में सफलता की दर औसतन 60 फीसदी रहती है। पर्यटन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इस बार आवेदन करने वाली महिला पर्वतारोहियों की संख्या का भी रिकॉर्ड बना है। अब तक 93 महिला पर्वतारोहियों को परमिट जारी किए जा चुके हैं।