अमेरिकी संस्था मिलेनियम चैलेंज कॉरपोरेशन (एमसीसी) से आर्थिक सहायता लेने का मसला नेपाल सरकार के लिए गले की फांस बन गया है। एक तरफ इसे लेकर वह अमेरिका और चीन की रस्साकशी में फंस गई है, वहीं इस मसले को लेकर देश में राजनीतिक अस्थिरता और अशांति के हालात बन गए हैं।
इसके बीच नेपाल के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि कौन-सी विकास सहायता देश और नेपाल के लोगों के हित में है, इस बारे में फैसला अब देश की संसद करेगी। विदेश मंत्रालय ने कहा- ‘नेपाल ने हमेशा ही स्वतंत्र, संतुलित और गुट-निरपेक्ष विदेश नीति का पालन किया है। इस नीति पर चलते हुए एक संप्रभु देश के रूप में नेपाल ने अपनी राष्ट्रीय जरूरतों और प्राथमिकताओं के अनुरूप विकास सहायता स्वीकार की है और उसका उपयोग किया है।’
कूटनीतिक हलकों में विदेश मंत्रालय के इस बयान को अहम माना गया है। अमेरिका ने चेतावनी दी है कि अगर नेपाल ने ये सहायता स्वीकार नहीं की, तो वह नेपाल के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों पर पुनर्विचार करेगा। उधर अमेरिका की इस धमकी पर बीते सप्ताहांत चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने अमेरिकी धमकी को ‘जोर-जबरदस्ती की कूटनीति’ करार दिया। विश्लेषकों का कहना है कि नेपाल में अमेरिका और चीन दोनों के समर्थक समूह मौजूद हैं। इसलिए इन दोनों बड़ी ताकतों की अंतरराष्ट्रीय खींचतान नेपाल की अंदरूनी राजनीति में भी जाहिर हो रही है।
नेपाली अखबारों में छपी खबरों के मुताबिक एमसीसी की सहायता स्वीकार करने के मुद्दे पर सत्ताधारी गठबंधन के भीतर तीखे मतभेद कायम हैं। इसलिए समझा जा रहा है कि अनुमोदन प्रस्ताव पेश कर प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा की सरकार ने एक बड़ा जोखिम मोल लिया है।
इस बीच काठमांडू स्थित अमेरिकी दूतावास ने कहा है कि एमसीसी की सहायता नेपाल के लिए अमेरिका का उपहार है, जिससे वहां नेपाल में नौकरियां पैदा होंगी और बुनियादी ढांचा निर्मित होगा। दूतावास ने ध्यान दिलाया है कि नेपाल सरकार के अनुरोध पर ये मदद देने का फैसला हुआ था। इस प्रस्ताव में पूरी पारदर्शिता बरती गई है।
दूतावास ने ये बयान शनिवार को जारी किया था। लेकिन उसका अमेरिकी मदद के विरोधियों पर कोई असर नहीं दिखा है। रविवार को इस प्रस्ताव के खिलाफ देश भर में प्रदर्शन हुए। पर्यवेक्षकों का कहना है कि जनता में आक्रोश के कारण यह संभावना नहीं दिखती संसद में अनुमोदन प्रस्ताव आसानी से पारित हो जाएगा।