भीषण आपदा के एक सप्ताह बाद भी नेपाली बचावकर्मी जीवित बचे लोगों की तलाश में जुटे हैं। हालांकि गाढ़े कीचड़ में लोगों का बचना बेहद मुश्किल है। शवों को खोजने में भी बचावकर्मियों को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि उन्हें अब भी लापता लोगों में से कुछ के जीवित बचे होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि चमत्कार होते हैं और वे अभी उम्मीद नहीं छोड़ना चाहते।
अज्ञात शवों को सामूहिक तौर पर दफनाया जा रहा
नेपाल में मुर्दाघरों के भर जाने के चलते डीएनए नमूना लेकर अज्ञात शवों को दफनाया जा रहा है। हालांकि इसे लेकर हिंदू धर्म को मानने वाले लोगों में नाराजगी है और वे सभी शवों को दफनाने पर आपत्ति जता रहे हैं। यही वजह है कि कई लोगों ने अपने प्रियजनों को मृत मानकर उनके पुतले बनाकर हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार पुतलों का अंतिम संस्कार करना शुरू कर दिया है।
लापता लोगों में 30 से अधिक देशों के 800 से अधिक विदेशी नागरिक भी शामिल हैं, जिनमें से 583 नेपाल में और 261 चीन में है। इनमें हिमालय में ट्रेकिंग करने आए पर्यटक और साथ ही तिब्बत में पवित्र कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए हिंदू तीर्थयात्री भी शामिल हैं।
सिर्फ 95 शव परिवारों को सौंपे गए
नेपाल में त्रासदी के बाद बरामद शवों में से अब तक केवल 95 शवों की पहचान हो पाई है और उन्हें उनके परिवारों को सौंप दिया गया है। बाकी शवों की पहचान की प्रक्रिया जारी है। बड़ी संख्या में शवों की पहचान नहीं हो पाने के कारण प्रशासन को वैज्ञानिक तरीके अपनाने पड़ रहे हैं। नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने एक दिन पहले फेसबुक पोस्ट के जरिए बताया था कि बाढ़ में मारे गए लोगों के शवों और अज्ञात शवों को कानून के अनुसार और वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत संभाला जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार केवल उन शवों का प्रबंधन कर रही है जिनकी पहचान फिलहाल संभव नहीं है। ऐसे मामलों में डीएनए सैंपल और दूसरे जरूरी सबूत सुरक्षित रखे जा रहे हैं, ताकि आगे चलकर शव की पहचान की जा सके। प्रधानमंत्री के मुताबिक, शवों के प्रबंधन में नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल की मदद ली जा रही है। जिन शवों की पहचान हो चुकी है, उन्हें उनके परिवारों को सौंपा जा रहा है।