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नेपाल-चीन में 1500 के करीब लोग लापता: इनमें बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक शामिल, मृतकों का आंकड़ा 175 हुआ

Thu, 27 Aug 2026 12:07 PM IST
नितिन गौतम पीटीआई, काठमांडू

सार

तिब्बत में ग्लेशियर टूटने से आई तबाही में मृतकों का आंकड़ा 175 तक पहुंच गया है। वहीं नेपाल और चीन में 1500 के करीब लोग अभी भी लापता हैं। नेपाल में लापता लोगों में बड़ी संख्या विदेशी पर्यटकों की है। 
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नेपाल त्रासदी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नेपाल त्रासदी की भयावहता कितनी बड़ी है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें नेपाल और चीन में 1500 के करीब लोग लापता हैं। जिनमें तिब्बत में 588 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। वहीं नेपाल सरकार ने कहा है कि उनके वहां 800 से ज्यादा लोग लापता हैं, जिनमें बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक शामिल हैं। 
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नेपाल में 826, चीन में 588 लोग लापता
नेपाल के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का कहना है कि अचानक आई बाढ़ के बाद 826 लोग संपर्क से बाहर हैं। इनमें 579 पर्यटक शामिल हैं। लापता लोगों में नेपाली सशस्त्र बलों के 85 जवान भी शामिल हैं। वहीं विभिन्न हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट में काम कर रहे 162 स्टाफ सदस्यों के बारे में भी कुछ पता नहीं चल सका है। 

नेपाल सरकार ने कहा कि विदेशी नागरिकों सहित सैकड़ों लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। बुधवार देर शाम जारी एक बयान में, प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि नेपाल सेना के 44 जवान, विभिन्न पुलिस चौकियों पर तैनात नेपाल पुलिस के 28 जवान और आपदा ग्रस्त क्षेत्र में तैनात 13 सशस्त्र पुलिस बल (एपीएफ) के जवानों से संपर्क नहीं हो पाया है। वहीं नेपाल विदेश मंत्रालय ने 300 से ज्यादा भारतीयों के लापता होने की पुष्टि की है।
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तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा ने जताया दुख
तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा ने नेपाल के रसुवा इलाके और तिब्बत के कीरोंग में आई विनाशकारी बाढ़ से हुई जनहानि पर दुख जताया है। गुरुवार को उन्होंने एक बयान जारी कर अपनी भावनाएं व्यक्त की। नोबेल शांति पुरस्कार विजेता ने एक बयान में कहा, 'नेपाल के रसुवा क्षेत्र और तिब्बत के कीरोंग में विनाशकारी बाढ़ के बारे में जानकर मुझे दुख हुआ है। इस आपदा की वजह से कई लोगों ने जान गंवाई और भारी नुकसान हुआ। मैं उन सभी लोगों के लिए प्रार्थना करता हूं जिन्होंने अपनी जान गंवाई है, और शोक संतप्त और इस त्रासदी पीड़ित सभी लोगों के प्रति अपनी सहानुभूति और हार्दिक संवेदना व्यक्त करता हूं।'

दलाई लामा ने कहा, 'मुझे उम्मीद है कि जहां भी संभव हो, उचित फॉलोअप उपाय किए जाएंगे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ऐसी आपदाएं दोबारा न हों।' तिब्बती क्षेत्र से होते हुए बाढ़ सीमा पार भोटेकोशी नदी पहुंच गई, और नेपाल में विनाश का निशान छोड़ गई।

भूकंप नहीं, ग्लेशियर टूटने से आई तबाही
यूएस जियोलॉजिकल सर्वे ने एक बयान में साफ किया है कि नेपाल में आई तबाही का कारण भूकंप नहीं था। गौरतलब है कि पहले ऐसा कहा जा रहा था कि भूकंप के चलते तिब्बत में ग्लेशियर टूटा, जिससे नेपाल-चीन में अचानक बाढ़ आई। हालांकि अब यूएस जियोलॉजिकल सर्वे ने साफ कर दिया है कि भूकंप नहीं आया था। ग्लेशियर के टूटने से भूकंप जैसे झटके महसूस हुए। ग्लेशियर टूटने से जो भूकंपीय कंपन हुई, उसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.2 मापी गई है। 
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