नेपाल में हुए संसदीय और प्रांतीय आम चुनाव में ऐसे नतीजे सामने आ रहे हैं, जिनका अनुमान पहले नहीं लगाया गया था। इससे अगली सरकार के बारे में अनिश्चय और बढ़ गया है। छह महीने पहले बनी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी और तराई में कुछ नई पार्टियों को मिली अप्रत्याशित सफलता से सारे समीकरण गड़बड़ा गए लगते हैं। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी का गठन टीवी स्टार रवि लमिछाने ने किया था।
राजनीतिक-शास्त्रियों के मुताबिक चुनाव के बाद उभरने वाली सियासी सूरत का ठोस संकेत अगले हफ्ते मिल पाएगा। लेकिन अब ऐसी अटकलें मजबूत हो रही हैं कि नतीजे वैसे नहीं रहेंगे, जैसा सत्ताधारी गठबंधन ने सोचा था। इसलिए सियासी हलकों में सत्ताधारी गठबंधन के अगले स्वरूप पर कयास लगाए जा रहे हैं। नई सूरत में प्रधानमंत्री कौन बनेगा, यह मुद्दा भी बहुचर्चित हो गया है।
इन चर्चाओं के बीच नेपाली कांग्रेस के नेता गगन थापा का नाम सबसे ज्यादा ध्यान खींच रहा है। थापा अगली प्रतिनिधि सभा के लिए निर्वाचित हो चुके हैं। वे प्रधानमंत्री बनने की महत्त्वाकांक्षा रखते हैं, इसे उन्होंने कभी नहीं छिपाया है। इस चुनाव में अपनी जीत के बाद दिए भाषण में भी उन्होंने कहा- ‘आज के बाद मैं नेपाली कांग्रेस के संसदीय दल के नेता पद के चुनाव की तैयारी शुरू करूंगा।’ थापा चौथी बार सांसद चुने गए हैं।
आम अनुमान है कि प्रधानमंत्री पद पर थापा के दावा जता देने से प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा की मुश्किलें बढ़ेंगी। वैसे रामचंद्र पौडेल और प्रकाश मान सिंह जैसे नेता भी प्रधानमंत्री बनने की महत्त्वाकांक्षा रखते हैं। दोनों इस चुनाव में नेपाली कांग्रेस के टिकट पर निर्वाचित हो चुके हैं।
नेपाली कांग्रेस के एक नेता अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘थापा नेपाली कांग्रेस के शेखर कोइराला गुट से जुड़े हैं। इसलिए पहले उन्हें इस गुट का समर्थन हासिल करना होगा। इसलिए प्रधानमंत्री कौन बनेगा, इस बारे में अभी कुछ कहना मुश्किल है।’ नेपाली कांग्रेस की कार्यसमिति के एक सदस्य ने कहा- ‘पहली बात तो यह देखने की है कि मौजूदा सत्ताधारी गठबंधन बना रहता है या नहीं। दूसरी बात यह देखने की होगी कि क्या नेपाली कांग्रेस अगली सरकार का नेतृत्व करने की स्थिति में रहती है। अगर मौजूदा गठबंधन बना रहा, तो गगन थापा अवश्य ही प्रधानमंत्री पद के एक मजबूत दावेवार होंगे।’
राजनीतिक विश्लेषक पुरंजन आचार्या के मुताबिक थापा ने अपने चुनाव क्षेत्र में यह वादा करते हुए वोट मांगा कि वे प्रधानमंत्री बनेंगे। इसलिए वे इस पद की दावेदारी से हट नहीं सकते हैं। उन्होंने कहा- ‘लेकिन उनके सामने आसान रास्ता नहीं है।’ प्रतिनिधि सभा की 165 प्रत्यक्ष निर्वाचन वाली सीटों में से नेपाली कांग्रेस ने 91 सीटों पर ही चुनाव लड़ा है। पार्टी को सदन में सबसे बड़े दल के रूप में उभरने के लिए विपक्षी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) के साथ कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है।
राजनीतिक टीकाकारों मुताबिक जैसे-जैसे नतीजे सामने आ रहे हैं, उससे नेपाली कांग्रेस में घबराहट बढ़ रही है। पार्टी के एक प्रवक्ता के एक बयान से भी यह बात सामने आई है। उन्होंने कहा- ‘गठबंधन से नाराज मतदाताओं ने उन चुनाव क्षेत्रों में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी को वोट दिया, जहां नेपाली कांग्रेस का उम्मीदवार नहीं था। इससे आनुपातिक प्रतिनिधित्व वाले हमारे वोट भी इस नई पार्टी के हिस्से में चले गए।’