फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Nepal Elections: मतगणना में पिछड़ने के बाद ओली ने चला ‘कम्युनिस्ट एकता’ का दांव

Sat, 26 Nov 2022 04:49 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो

सार

Nepal Elections: सूत्रों के हवाले से आई खबरों के मुताबिक फोन बातचीत के दौरान ओली और दहल ने एक दूसरे को बधाई दी। इसी दौरान ओली ने दहल के सामने मिल कर कम्युनिस्ट सरकार बनाने का प्रस्ताव रखा। लेकिन दहल ने इस पर कोई साफ जवाब नहीं दिया...
विज्ञापन
Nepal Elections: KP sharma OLI and Pushp Kamal Dahal - फोटो : Nepal Mountain News (सांकेतिक)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

नेपाल के आम चुनाव अपनी पार्टी को पिछड़ता देख पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने फिर से ‘कम्युनिस्ट एकता’ का दांव चल दिया है। राजनीतिक पर्यवेक्षक उनकी इस चाल को गंभीरता से ले रहे हैं। आम चुनाव में प्रतिनिधि सभा के लिए प्रत्यक्ष निर्वाचन की मतगणना में नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन ने अब साफ बढ़त बना ली है। समझा जाता है कि अगर यही ट्रेंड रहा, तो पूरे नतीजे घोषित होने के बाद चार दलों का यह गठबंधन सरकार बनाने की स्थिति में होगा। इसी बीच ओली ने ‘कम्युनिस्ट एकता’ का पासा फेंका है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) के अध्यक्ष ओली ने सत्ताधारी गठबंधन के हिस्से कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) के प्रमुख पुष्प कमल दहल को इस चुनाव में उनकी जीत की बधाई देने के लिए फोन किया। ओली और दहल दोनों अपनी-अपनी सीटों से चुनाव जीत चुके हैं। सत्ताधारी गठबंधन में दहल की पार्टी दूसरे नंबर पर चल रही है।

सूत्रों के हवाले से आई खबरों के मुताबिक फोन बातचीत के दौरान ओली और दहल ने एक दूसरे को बधाई दी। इसी दौरान ओली ने दहल के सामने मिल कर कम्युनिस्ट सरकार बनाने का प्रस्ताव रखा। लेकिन दहल ने इस पर कोई साफ जवाब नहीं दिया। उन्होंने सिर्फ यह कहा- सभी चुनाव नतीजे आने के बाद के बाद मैं उचित निर्णय लूंगा।

डेढ़ साल पहले तक दहल और ओली एक ही पार्टी का हिस्सा थे। लेकिन तब पार्टी बंट गई थी और दहल ने नेपाली कांग्रेस से हाथ मिला लिया था। उसी समय माधव कुमार नेपाल ने भी ओली से अलग होकर कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड सोशलिस्ट) नाम से अपनी अलग पार्टी बना ली थी। यह पार्टी भी सत्ताधारी गठबंधन में शामिल है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक अगर ये दोनों पार्टियां यूएमएल से मिल जाएं, तो ‘कम्युनिस्ट सरकार’ बनने की संभावना मजबूत हो जाएगी। वैसे इस बारे में लग रही अटकलों के बीच माओइस्ट सेंटर की पोलित ब्यूरो के सदस्य सुनील मानधर सत्ताधारी गठबंधन टूटने की संभावना से इनकार किया है।   

इन चुनावों में राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी-नेपाल की मिली अप्रत्याशित सफलता भी यहां सियासी हलकों में चर्चा का विषय है। हिंदू राष्ट्र और राजतंत्र समर्थक यह पार्टी शुक्रवार तक प्रत्यक्ष निर्वाचन वाली चार संसदीय सीटें जीत चुकी थी और दो में बढ़त बनाए हुए थी। इसके अलावा तीन फीसदी से ज्यादा वोट पाकर आनुपातिक प्रतिनिधित्व के तहत संसद में प्रतिनिधित्व पाने की हकदार हो चुकी है। जबकि 2017 के आम चुनाव में राजतंत्र समर्थक पार्टियों की करारी हार हुई थी।

नेपाल में आम चुनाव के लिए मतदान 20 नवंबर को हुआ था। उस रोज संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा की 165 और सात प्रांतीय असेंबलियों की ऐसी 330 सीटों के लिए वोट डाले गए थे। नेपाल में चुनाव प्रत्यक्ष निर्वाचन और आनुपातिक प्रतिनिधित्व की मिली-जुली प्रणाली से होता है। प्रतिनिधि सभा में मिले वोट प्रतिशत के आधार 110 सीटों का आवंटन पार्टियों के बीच किया जाएगा। प्रांतीय असेंबलियों में ऐसी 220 सीटें हैं।

यहां अभी पर्यवेक्षकों का ध्यान संसदीय चुनाव के उभर रहे रुझान पर ही टिका हुआ है। संभावना है कि सोमवार रात तक प्रत्यक्ष निर्वाचन वाली सारी सीटों के नतीजे आ जाएंगे। लेकिन आनुपातिक प्रतिनिधित्व वाली सीटों का आवंटन आठ दिसंबर तक जाकर पूरा हो पाएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें