Nepal: पुष्प कमल दहाल के साथ नेपाल के पीएम शेर बहादुर देउबा
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सत्ताधारी नेपाली कांग्रेस में अगले आम चुनाव के लिए सीट बंटवारे के मुद्दे बगावत का खतरा पैदा हो रहा है। पार्टी के कई नेताओं चेतावनी दी है कि अगर पार्टी नेतृत्व गठबंधन के अंदर पर्याप्त सीटें हासिल करने में नाकाम रहा, तो पार्टी को विद्रोह का सामना करना पड़ेगा। इस साल मई में हुए स्थानीय चुनाव के दौरान भी पार्टी के कई नेताओं ने टिकट ना मिलने पर बगावत कर दी थी।
नेपाल में संघीय संसद और प्रांतीय असेंबलियों के लिए आम चुनाव अगले 20 नवंबर को होगा। नेपाली कांग्रेस ने इसमें चार अन्य दलों के साथ मिल कर मैदान में उतरने का फैसल किया है। गठबंधन में सहमति बनी है कि प्रांतीय असेंबलियों के लिए टिकट का बंटवारा संघीय संसद के लिए बने फॉर्मूले के आधार पर किया जाएगा। लेकिन संघीय संसद के लिए गठबंधन सहयोगियों के बीच सीटों का आवंटन टेढ़ी खीर बना हुआ है।
नेपाली संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा के 165 प्रत्यक्ष निर्वाचन वाली सीटों से चुने जाएंगे। नेपाली कांग्रेस में प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा के विरोधी नेताओं ने साफ कर दिया है कि पार्टी नेतृत्व इनमें से कम से कम 100 सीटें लेने में नाकाम रही, तो यह उन्हें मंजूर नहीं होगा। नेपाली कांग्रेस में फूट पड़ने के संकेत लगातार मिल रहे हैं। मई के स्थानीय चुनावों में टिकट ना मिलने पर देउबा के पूर्व निजी सचिव कर्ण मल्ला ने बगावत कर दी थी। संसदीय चुनाव में उन्होंने देउबा को उनकी सीट पर हराने को अपना लक्ष्य घोषित किया है।
उधर नेपाली कांग्रेस का जगन्नाथ पौडेल खेमा चितवन इलाके में सत्ताधारी गठबंधन के उम्मीदवारों के खिलाफ अपने प्रत्याशी उतारने की तैयारी कर रहा है। स्थानीय चुनावों में पौडेल ने खुद बगावत कर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था। उधर संसदीय चुनाव से पहले दिग्गज नेता शेखर कोइराला विद्रोही तेवर में नजर आ रहे हैं। उन्होंने जनकपुर में एक समारोह में कहा- ‘हमें कम से कम 100 सीटों पर जरूर लड़ना चाहिए, ताकि पार्टी बहुमत पा सके। वैसे तो पार्टी में जितने लोग चुनाव लड़ना चाहते हैं, उसे देखते हुए 165 सीटें भी कम हैं।’
पूर्व सांसद राधेश्याम अधिकारी ने तो यहां तक कहा है कि नेपाली कांग्रेस को गठबंधन के हिस्से के रूप में चुनाव लड़ने के बजाय कुछ सीटों पर दूसरे दलों से तालमेल भर करना चाहिए, ताकि उसके अधिक उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतर सकें। नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चंद्र भंडारी ने कहा है कि पार्टी नेतृत्व अपने ही नेताओं का भरोसा खो रहा है, जिसका आखिरी परिणाम विद्रोह के रूप में सामने आएगा।
नेपाली कांग्रेस की संसदीय समिति ने बुधवार को अपनी बैठक में फैसला किया कि स्थानीय चुनावों में उम्मीदवार रह चुके नेताओं को संघीय संसद या प्रांतीय असेंबलियों के लिए टिकट नहीं दिया जाएगा। उधर पार्टी के संयुक्त महासचिव उमाकांत चौधरी और सांसद अमरेश कुमार सिंह के खिलाफ अनुशासन की कार्रवाई की है। दोनों पर स्थानीय चुनावों के दौरान पार्टी के खिलाफ काम करने का आरोप है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक पार्टी के इन फैसलों ने अंदरूनी विरोध को और भड़का दिया है।