Nepal Election: शेर बहादुर देउबा और केपी शर्मा ओली
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नेपाल के अगले आम चुनाव में मुकाबले की रेखाएं अब साफ होने लगी हैं। आम चुनाव तक नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व वाला सत्ताधारी गठबंधन कायम रहेगा, यह फिलहाल तय हो गया है। अगर बाद में सीटों के बंटवारे को लेकर कोई बड़ा मतभेद खड़ा नहीं हुआ, तो प्रमुख विपक्षी दल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनाइटेड मार्क्सिस्ट लेनिनिस्ट) का सत्ताधारी गठबंधन से सीधा मुकाबला होगा।
सत्ताधारी गठबंधन के भीतर सीटों के बंटवारे के सिद्धांत पर सहमति बन गई है। अगले 20 नवंबर को नेपाल में संघीय और प्रांतीय विधायिकाओं के लिए एक साथ मतदान होगा। मतदान एक चरण में ही पूरा कराया जाएगा। चुनाव कार्यक्रम का अब औपचारिक एलान हो चुका है।
सत्ताधारी गठबंधन की शुक्रवार को हुई एक महत्त्वपूर्ण बैठक में एकजुट रहते हुए चुनाव में उतरने का फैसला किया गया। इससे ये कयास खत्म हो गए हैं कि पुष्प कमल दहल के नेतृत्व वाली कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) गठबंधन छोड़ सकती है। सत्ताधारी गठबंधन की बैठक के बाद माओइस्ट सेंटर के नेता नारायण काजी श्रेष्ठ ने पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने कहा- ‘सत्ताधारी गठबंधन में शामिल दलों ने एक टास्क फोर्स बनाने का फैसला किया है, जो इन पार्टियों के बीच सीटों का बंटवारा तय करेगा।’
प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा की नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन में माओइस्ट सेंटर के अलावा कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड सोशलिस्ट), जनता समाजवादी दल और राष्ट्रीय जन मोर्चा शामिल हैं। नेपाली कांग्रेस के एक नेता मीडिया को बताया कि टास्क फोर्स यह तय करेगा कि इन पांचों में से कौन सी पार्टी कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी।
अगले 20 नवंबर को होने वाले आम चुनाव में मुख्य नजर संघीय संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा के चुनाव पर रहेगी। प्रतिनिधि सभा में 275 सीटें हैं। नेपाल में चुनाव की मिली-जुली प्रणाली अपनाई गई है। इसके तहत 165 सीटों के लिए प्रत्यक्ष मतदान होता है। बाकी 110 सीटें पार्टियों को मिले वोट प्रतिशत के आधार पर उनके बीच बांटी जाती हैं।
प्रांतीय विधायिकाओं के लिए चुनाव भी इस प्रणाली के तहत होता है। नेपाल में कुल सात प्रांत हैं, जिनकी विधायिकाओं के चुनाव के लिए 20 नवंबर को मतदान होगा। इन विधायिकाओं में कुल 550 सीटें हैं। उनमें से 330 का चुनाव प्रत्यक्ष चुनाव के जरिए होता है। 220 सीटें आनुपातिक प्रतिनिधित्व के अनुरूप वितरित की जाती हैं।
नेपाल के निर्वाचन आयोग ने गुरुवार को चुनाव कार्यक्रम का औपचारिक एलान किया था। उसके एक दिन बाद सत्ताधारी गठबंधन ने अपनी बैठक की। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इसमें जो टास्क फोर्स बनाने का फैसला हुआ, उसे सभी पार्टियों के लिए सीटों की संख्या तय करने का काम दिया जाएगा। टास्क फोर्स अपनी रिपोर्ट सभी पार्टियों के वरिष्ठतम नेताओं को सौंपेगा। अंतिम फैसला वरिष्ठ नेता ही करेंगे।
अखबार काठमांडू पोस्ट ने अपनी एक रिपोर्ट में पार्टियों के अंदरूनी सूत्रों के हवाले से कहा है कि सीटों का बंटवारा एक कठिन काम साबित होगा। इसकी वजह पार्टियों की अपनी ऊंची अपेक्षाएं हैं। नेपाली कांग्रेस सीधे निर्वाचन वाली सीटों में कम से कम 110 सीट अपने लिए चाहती है। जबकि बाकी चारों दलों ने अपने लिए जो न्यूनतम मांग रखी है, उसके मुताबिक नेपाली कांग्रेस को उनके लिए 80 सीटें छोड़नी होगी।