नेपाल में 5 मार्च को प्रतिनिधि सभा चुनाव नतीजों ने उम्मीदवारों की लोकप्रियता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, देश के 14 उम्मीदवारों को एक भी वोट नसीब नहीं हुआ, जबकि 36 प्रत्याशी केवल एक-एक वोट ही जुटा सके। प्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली के तहत चुनावी मैदान में उतरे कुल 3,406 उम्मीदवारों में से 2,885 की जमानत जब्त हो गई है, जो कुल प्रत्याशियों का लगभग 85% है।
नियमत: कुल वैध मतों का 10% न पाने वाले उम्मीदवारों की जमानत राशि जब्त कर ली जाती है। शून्य मत पाने वालों में काठमांडो-1 से नेपाल जनसेवा पार्टी के अर्जुन बहादुर शाही के अलावा बाकी सभी निर्दलीय हैं। धनुषा, धादिड़, ललितपुर और रूपन्देही जैसे जिलों से भी कई उम्मीदवारों का खाता नहीं खुला। जमानत गंवाने वालों में निर्दलीय ही नहीं, प्रमुख दलों के दिग्गज भी शामिल हैं।
एमाले के पूर्व वरिष्ठ उपाध्यक्ष ईश्वर पोखरेल अपनी जमानत नहीं बचा सके। दलों की बात करें तो राप्रपा के 159, नेकपा के 99 और कांग्रेस के 17 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हुई। लगभग दो तिहाई सीटों के साथ सरकार बनाने की ओर बढ़ रही आरएसपी के भी 14 उम्मीदवारों को 10% से कम वोट मिले। यानी मतदाताओं का समर्थन गिने-चुने सियासी विकल्पों तक सीमित रखा है।
चुनाव में 14 महिलाओं की भी जीत
इस संसदीय चुनाव में 14 महिलाएं संसद के लिए चुनी गई हैं, जो कुल सीटों का करीब आठ प्रतिशत से थोड़ा अधिक है। इनमें से 13 सीटों पर राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) ने जीत दर्ज की है, जबकि एक सीट नेपाली कांग्रेस के खाते में गई है। यह आंकड़ा पिछले चुनावों की तुलना में बेहतर माना जा रहा है। वर्ष 2022 के चुनाव में केवल 9 महिला उम्मीदवार ही जीत पाई थीं, जो कुल सीटों का करीब 5.45 प्रतिशत थीं।
गौरतलब है कि निर्वाचन आयोग के अनुसार प्रत्यक्ष चुनाव की 165 में से 164 सीटों के परिणाम घोषित हो चुके हैं। इनमें आरएसपी ने 125 सीटें जीतकर स्पष्ट बढ़त हासिल की है। समानुपातिक प्रणाली के तहत मिलने वाली सीटों के बाद पार्टी की कुल संख्या 183 तक पहुंच जाएगी। 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में यह संख्या दो-तिहाई बहुमत के बराबर है। इसके बाद अब संविधान के तहत नई सरकार के गठन की औपचारिक प्रक्रिया शुरू होगी।