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Nepal: नागरिकता का मुद्दा फिर गरम, नए कानून के समर्थन और विरोध में जन प्रदर्शन

Fri, 16 Jun 2023 03:37 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो

सार

नेपाल में नया संविधान लागू होने के बाद बनाए गए नागरिकता कानून में प्रावधान किया गया था कि 12 अप्रैल 1990 के पहले नेपाल की जमीन जन्मे सभी लोगों देश की नागरिकता मिलेगी। लेकिन उनकी संतानों को सिर्फ इस आधार पर देश की नागरिकता नहीं मिलेगी कि वे उन लोगों की संतान हैं...
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Nepal citizenship law - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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नेपाल में नागरिकता कानून को लेकर फिर लोग सड़कों पर उतर आए हैं। इस कानून से संबंधित विधेयक को पिछली शेर बहादुर देउबा सरकार ने पारित कराया था, लेकिन तब उसे तत्कालीन राष्ट्रपति विद्यादेवी भंडारी ने मंजूरी नहीं दी। देश में नए आम चुनाव के बाद बनी नई सरकार की पहल पर नए राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने पिछले महीने पारित बिल पर दस्तखत कर दिए थे। मगर इस महीने की चार तारीख को सुप्रीम कोर्ट ने इसके अमल पर रोक लगा दी। इससे तुरंत नागरिकता मिलने की हजारों लोगों की उम्मीदों पर फिलहाल पानी फिर गया है। ये लोग अब अब आंदोलन पर उतर आए हैं।

कानून के अमल पर रोक सुप्रीम कोर्ट के एक सदस्यीय बेंच ने लगाई। जस्टिस मनोज शर्मा ने दो वकीलों की याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार को आदेश दिया कि वह इस कानून के मुताबिक अभी किसी को भी नागरिकता प्रदान न करे। नागरिकता कानून में पारित कराए मौजूदा संशोधन के तहत उन लोगों की संतानों को नागरिकता देने का प्रावधान है, जिनके माता-पिता जन्मजात नेपाल के नागरिक नही थे। उन लोगों ने संविधान में तय प्रक्रिया के तहत नेपाल की नागरिकता प्राप्त की। अब कानून पर रोक से प्रभावित लोग पूछ रहे हैं कि अगर उनके माता-पिता नेपाल के नागरिक थे, तो वे कहां के नागरिक हैं?

नेपाल में नया संविधान लागू होने के बाद बनाए गए नागरिकता कानून में प्रावधान किया गया था कि 12 अप्रैल 1990 के पहले नेपाल की जमीन जन्मे सभी लोगों देश की नागरिकता मिलेगी। लेकिन उनकी संतानों को सिर्फ इस आधार पर देश की नागरिकता नहीं मिलेगी कि वे उन लोगों की संतान हैं। नागरिकता प्राप्त करने के लिए उन्हें देश में इसके लिए मौजूद कानून के अनुरूप अर्जी देनी होगी। संशोधित कानून में ऐसे सभी लोगों को स्वतः नागरिकता देने का प्रावधान है।

सुप्रीम कोर्ट में संशोधित कानून को इस आधार पर चुनौती दी गई है कि राष्ट्रपति पौडेल ने उस पर दस्तखत करते हुए सही प्रक्रिया का पालन नहीं किया। इस दलील को फिलहाल कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। काठमांडू में सड़कों पर उतरे सैकड़ों लोगों ने एक जन सभा की, जिसमें वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट राजनीति से प्रेरित फैसले दे रहा है।

नागरिकता कानून में संशोधन का प्रमुख विपक्षी दल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) ने विरोध किया था। राष्ट्रपति पौडेल के इस पर दस्तखत करने के बाद यूएमएल राष्ट्रपति विरोधी सभाएं आयोजित कर रही है। इसलिए संशोधन के समर्थन में सड़कों पर उतरे लोगों ने यूएमएल अध्यक्ष केपी शर्मा ओली के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। उन्होंने याचिका दायर करने वाले दोनों वकीलों के खिलाफ भी नारे लगाए।

आंदोलनकारियों का कहना है कि संशोधित कानून पर अमल में देरी से सैकड़ों लोगों की नागरिकता पाने की उम्मीदों पर चोट हुई है। नागरिकता ना होने के कारण ऐसे लोगों के लिए देश में बैंक खाते खोलना, शिक्षा पाना, नौकरी पाना या विदेश जाना मुश्किल बना हुआ है। इन लोगों का आरोप है कि इस मुद्दे को बेवजह राजनीतिक रंग दे दिया है, जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है।

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