Nepal- Global Development Initiative by China
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नेपाल में चीन की कोशिशें सफल होती लग रही हैं। यहां चीन के ग्लोबल डेवलपमेंट इनिशिएटिव (जीडीआई) के तहत दो परियोजनाओं का चयन किया गया है। जिस समय चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के तहत तय की गई किसी भी परियोजना पर काम आगे नहीं बढ़ रहा है, इन दो परियोजनाओं के चयन को एक बड़े कदम के रूप में देखा गया है। हाल में चीनी अधिकारियों के कई बड़े प्रतिनिधिमंडलों ने नेपाल की यात्रा की। ताजा घटना को उसका ही परिणाम बताया गया है।
चीन के विदेश मंत्रालय ने उन शुरुआती 50 परियोजनाओं की सूची जारी की है, जिन्हें जीडीआई के तहत निर्मित किया जाएगा। इन परियोजनाओं के बारे में फैसला न्यूयॉर्क में बुधवार को हुई फ्रेंड्स ऑफ जीडीआई समूह की बैठक में किया गया। इस बारे में सूचना गुरुवार को जारी की गई। न्यूयॉर्क में हुई बैठक की अध्यक्षता चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने की। बैठक में उन्होंने कहा कि जीडीआई को अब आगे बढ़ाया जाएगा और ये पहल टिकाऊ विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को 2030 तक पूरा करेगी।
नेपाल में जिन परियोजनाओं का चयन किया गया है, उनमें एक नेपाल स्माइलिंग चिल्ड्रेन प्रोजेक्ट है। इसके तहत चाइना फाउंडेशन फॉर रूरल डेवलपमेंट 3,600 नेपाली बच्चों को भोजन मुहैया कराया जा रहा है। अब इसे जीडीआई का हिस्सा बना दिया गया है। अब इस परियोजना को धन चीन की विदेश सहायता एजेंसी- चाइना इंटरनेशनल डेवलपमेंट को-ऑपरेशन एजेंसी (सीआईडीसीए), चीन का वाणिज्य मंत्रालय और चाइना फाउंडेशन फॉर रूरल डेवलपमेंट उपलब्ध कराएंगे। नेपाल स्माइलिंग चिल्ड्रेन प्रोजेक्ट का उद्घाटन जुलाई में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के विदेश विभाग के निदेशक लिउ जियानचाओ ने अपनी नेपाल यात्रा के दौरान किया था।
जीडीआई की घोषणा के साथ ही चीन ने साउथ-साउथ को-ऑपरेशन फंड की शुरुआत की थी। चीन के मुताबिक इन पहल का मकसद वैश्विक विकास भागीदारी शुरू करना है। इसके तहत गरीबी घटाने, स्वास्थ्य, शिक्षा, डिजिटल कनेक्टिविटी और अन्य क्षेत्रों में विकासशील देशों के बीच सहभागिता बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। चीन की समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक नेपाल स्माइलिंग चिल्ड्रेन प्रोजेक्ट के तहत काठमांडू, डोलाखा, महोटारी और सपटारी जिलों में 3,600 बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।
जीडीआई के तहत नेपाल में दूसरा प्रोजेक्ट सुदूर इलाकों में चलाया जाएगा। इसके तहत स्कूल बनाए जाएंगे, सुदूर इलाकों की आबादी को महामारी से बचाने के उपाय किए जाएंगे और जंगल लगाए जाएंगे। इस परियोजना पर अमल सीआईडीसीए, और चीन के वाणिज्य मंत्रालय के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के सहयोग से किया जाएगा। नेपाल सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘जीडीआई चीन का एक नया कॉन्सेप्ट है, जिसे संयुक्त राष्ट्र के टिकाऊ विकास लक्ष्यों से जोड़ा गया है। यही कारण है कि नेपाल ने इस पहल का समर्थन किया है। अब दो परियोजनाओं का चयन नेपाल के राष्ट्रीय योजना आयोग और वित्त मंत्रालय के साथ निकट तालमेल से किया गया है।’
नेपाल ने 2017 में बीआरआई में शामिल होने के करार पर दस्तखत किया था। लेकिन तब से उसके तहत एक भी परियोजना पर काम शुरू नहीं हो पाया है। इसे देखते हुए पर्यवेक्षकों ने कहा है कि जीडीआई की शुरुआत से नेपाल में चीन ने सद्भावना प्राप्त करने की कोशिश की है। नेपाल में दिखी शुरुआती प्रतिक्रिया से लगता है कि चीन की कोशिश फिलहाल कामयाब हो रही है।