नेपाल ने जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर अपनी कूटनीतिक कोशिशों को मजबूत करने के लिए विदेश मंत्रालय में पहली बार पर्यावरण कूटनीति विभाग बनाया है। मंत्रालय के मुताबिक, इस नए विभाग का मकसद जलवायु और पर्यावरण से जुड़े मामलों पर नेपाल की आवाज को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाना और अलग-अलग सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बनाना है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब जलवायु परिवर्तन से जुड़ी आपदाओं का खतरा नेपाल में लगातार गंभीर होता जा रहा है।
नेपाल ने पर्यावरण कूटनीति के लिए अलग विभाग क्यों बनाया?
- विदेश मंत्रालय में पहली बार पर्यावरण कूटनीति से जुड़ा अलग विभाग बनाया गया है। इसका उद्देश्य जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण से जुड़े कूटनीतिक प्रयासों को संस्थागत और मजबूत करना है।
- यह विभाग संयुक्त राष्ट्र और विशेष एजेंसियों से जुड़े मामलों को देखने वाले विभाग के तहत काम करेगा। इसकी जिम्मेदारी एक अवर सचिव के पास होगी।
- विभाग जलवायु और पर्यावरण से जुड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों और कार्यक्रमों में नेपाल की भागीदारी को सुगम बनाएगा। यह नेपाल की संबंधित राष्ट्रीय एजेंसियों के साथ भी समन्वय करेगा।
- सरकार का कहना है कि इससे जलवायु और पर्यावरण से जुड़ी नेपाल की प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए बेहतर व्यवस्था तैयार होगी।
नेपाल के लिए जलवायु परिवर्तन की चुनौती कितनी गंभीर है?
नेपाल में जलवायु परिवर्तन का असर बढ़ने के बीच विदेश मंत्रालय ने यह कदम उठाया है। मंत्रालय के मुताबिक, देश पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है और इससे निपटने के लिए प्रभावी तथा पर्याप्त कदमों की जरूरत है। इस साल 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ ने इस खतरे को और गंभीर रूप से सामने रखा। इन बाढ़ों में नेपाल में 1,400 से ज्यादा लोगों की मौत हुई और करीब 6,000 लोग लापता हुए। इस आपदा ने जलवायु से जुड़ी आपदाओं के बढ़ते खतरे को उजागर किया है।
नया विभाग किन कामों को संभालेगा?
नया पर्यावरण कूटनीति विभाग संयुक्त राष्ट्र और विशेष एजेंसियों से जुड़े विभाग के तहत काम करेगा। इसका नेतृत्व एक अवर सचिव करेंगे। विभाग का एक प्रमुख काम जलवायु और पर्यावरण से जुड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों तथा कार्यक्रमों में नेपाल की भागीदारी को सुगम बनाना होगा। इसके अलावा यह देश की संबंधित सरकारी एजेंसियों के साथ समन्वय करेगा। इसका उद्देश्य जलवायु और पर्यावरण से जुड़े मामलों में नेपाल की नीतियों और प्राथमिकताओं को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बेहतर तरीके से रखने के लिए एक मजबूत संस्थागत व्यवस्था तैयार करना है।
जलवायु मुद्दों पर नेपाल पहले से क्या करता रहा है?
नेपाल के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, देश राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाता रहा है। हालांकि, अब इन प्रयासों को केवल अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय बैठकों तक सीमित रखने के बजाय स्थायी और संस्थागत रूप देने की कोशिश की जा रही है। विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा है कि जलवायु कूटनीति को अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों और कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। इसे लंबे समय तक चलने वाली और संस्थागत प्रक्रिया के रूप में आगे बढ़ाना जरूरी है।
नए विभाग से नेपाल को क्या फायदा मिलने की उम्मीद है?
नेपाल के विदेश मंत्रालय का कहना है कि नए विभाग से जलवायु और पर्यावरण से जुड़े मामलों में विभिन्न संस्थाओं के बीच तालमेल मजबूत होगा। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नेपाल की भागीदारी को व्यवस्थित करने और देश की जलवायु प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। विभाग का गठन नेपाल के लिए जलवायु कूटनीति को एक स्थायी सरकारी व्यवस्था का हिस्सा बनाने की दिशा में कदम है। बढ़ते जलवायु जोखिम और हाल की विनाशकारी बाढ़ की पृष्ठभूमि में नेपाल अब पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को अपनी कूटनीतिक कोशिशों में और अधिक संस्थागत रूप देने की दिशा में बढ़ रहा है।