स्वीडन की पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग
- फोटो : Twitter@GretaThunberg
कोरोना महामारी के बीच नीट और जेईई की परीक्षाओं को लेकर शिक्षा मंत्रालय के फैसले का चारों ओर विरोध हो रहा है। कई विपक्षी राजनीतिक पार्टियां भी इसे लेकर विरोध जता चुकी हैं। वहीं, छात्रों को स्वीडन की पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग का भी साथ मिला है। थनबर्ग ने परीक्षाएं टालने की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि महामारी के दौर में परीक्षा गलत है।
स्वीडन की पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग जलवायु परिवर्तन के खिलाफ एक साल तक काम करने के बाद अब स्कूल लौट आई हैं। स्कूल लौटते ही ग्रेटा ने भारत में होने वाली जेईई और नीट परीक्षा, 2020 को स्थगित करने का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि भारत के बच्चों को कोरोना संकट और भीषण बाढ़ के बीच परीक्षा देने के लिए कहना अनुचित है। मैं परीक्षा को स्थगित करने के आह्वान का समर्थन करती हूं।
उन्होंने ट्वीट किया, "यह बहुत अनुचित है कि भारत के छात्रों को ऐसे समय में राष्ट्रीय परीक्षा में बैठने के लिए कहा जा रहा है, जब कोविड-19 महामारी के साथ ही लाखों लोग बाढ़ से भी प्रभावित हैं। मैं कोविड-19 के दौरान जेईई और नीट परीक्षा स्थगित करने के समर्थन में हूं।"
परीक्षा तय समय पर: एनटीए
वहीं, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने कहा कि जेईई (मेंस) और नीट (यूजी) की परीक्षाएं तय तारीखों पर ही होंगी। छात्रों का हित देखते हुए जेईई की परीक्षाएं एक से छह सितंबर और नीट की परीक्षा 13 सितंबर को होगी। जेईई के एडमिट कार्ड जारी हो चुके हैं और नीट के लिए जल्द जारी कर दिए जाएंगे।
बता दें कि, ग्रेटा एक साल बाद अपने स्कूल लौटी हैं। स्कूल लौटने के बाद ग्रेटा ने अपनी खुशी ट्विटर पर जाहिर की उन्होंने कहा, ''मेरा एक साल का स्कूल का गैप अब खत्म हो गया है और फिर से स्कूल में वापस आकर मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।'' हाल में ही जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र में 16 साल की कार्यकर्ता ने दुनियाभर के नेताओं को अपनी चिंताओं और सवालों से झकझोर दिया था। उन्हें 2019 के लिए ‘टाइम’ पत्रिका का ‘पर्सन ऑफ द ईयर’ चुना गया है।