संयुक्त राष्ट्र की परमाणु एजेंसी के प्रमुख राफेल ग्रोसी का कहना है कि साल 2060 तक दुनिया में परमाणु ऊर्जा का इस्तेमाल मौजूदा स्तर से तीन गुना से भी ज्यादा हो सकता है। इसकी बड़ी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर और बिजली की लगातार बढ़ती मांग है। इसके अलावा, कई देश ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और दूसरे देशों पर निर्भरता कम करने के लिए भी परमाणु ऊर्जा को अहम विकल्प मान रहे हैं।
बिजली की बढ़ती मांग से बढ़ेगी परमाणु ऊर्जा की अहमियत
राफेल ग्रोसी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश की गई IAEA की सालाना रिपोर्ट में कहा कि आने वाले वर्षों में बिजली की खपत तेजी से बढ़ेगी। खासकर AI से चलने वाले डेटा सेंटर और बड़ी टेक कंपनियों को लगातार बिजली की जरूरत होगी। ऐसे में परमाणु ऊर्जा की भूमिका बढ़ सकती है, क्योंकि इससे कम कार्बन उत्सर्जन के साथ बड़ी मात्रा में बिजली पैदा की जा सकती है।
दुनिया में 400 से ज्यादा परमाणु रिएक्टर चालू
ग्रोसी के मुताबिक, साल 2025 में दुनिया के 30 से ज्यादा देशों में 400 से अधिक परमाणु रिएक्टर काम कर रहे थे। इनसे दुनिया की कुल बिजली का करीब 10 फीसदी और कम कार्बन उत्सर्जन वाली बिजली का लगभग एक चौथाई हिस्सा पैदा हो रहा था। दुनियाभर में 60 से ज्यादा नए रिएक्टर बनाए जा रहे हैं। इससे आने वाले समय में परमाणु ऊर्जा की उत्पादन क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत की जरूरत
ग्रोसी ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि राजनयिक समझौते तक पहुंचने के लिए जरूरी तकनीकी काम पूरा हो चुका है। अब सभी पक्षों को बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश करनी चाहिए। पिछले साल अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले किए थे। ग्रोसी ने कहा कि किसी भी समझौते को टिकाऊ बनाने के लिए IAEA की निगरानी जरूरी है। उन्होंने ईरान से एजेंसी के निरीक्षकों को जल्द वापस आने की अनुमति देने की अपील की।
उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम पर चिंता
उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन अंतरराष्ट्रीय निगरानी के बिना अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहे हैं। ग्रोसी ने इसे गंभीर चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय नियमों की अनदेखी के गंभीर नतीजे हो सकते हैं। उत्तर कोरिया का परमाणु कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के भी खिलाफ है।
यूक्रेन के परमाणु संयंत्र पर खतरा
यूक्रेन में जारी युद्ध के बीच यूरोप के सबसे बड़े परमाणु बिजली संयंत्र, ज़ापोरिज़िया, की सुरक्षा भी चिंता का विषय बनी हुई है। ग्रोसी के अनुसार, यहां बार-बार बिजली आपूर्ति बाधित होती है और आपात स्थिति के लिए डीजल का बैकअप भी सीमित है। सैन्य गतिविधियों के कारण संयंत्र और वहां काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा पर खतरा बना हुआ है।
सीरिया के परमाणु कार्यक्रम पर अहम प्रगति
सीरिया के मामले में IAEA ने करीब दो दशक से लंबित सवालों को सुलझाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। ग्रोसी ने बताया कि यह काम अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शरा की सरकार के साथ बातचीत के बाद आगे बढ़ा है। इससे पहले उन्होंने कहा था कि बशर अल-असद के शासनकाल में सीरिया में ऐसा परमाणु रिएक्टर बनाया जा रहा था, जिसे परमाणु हथियारों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री तैयार करने के लिए डिजाइन किया गया था। दिसंबर 2024 में असद सरकार को सत्ता से हटा दिया गया था।
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परमाणु ऊर्जा के साथ सुरक्षा भी जरूरी
IAEA प्रमुख के बयान से साफ है कि आने वाले दशकों में परमाणु ऊर्जा दुनिया की बिजली जरूरतों को पूरा करने में बड़ी भूमिका निभा सकती है। AI, डेटा सेंटर और बढ़ते विद्युतीकरण से इसकी मांग बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, ईरान और उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम, यूक्रेन में संयंत्र की सुरक्षा और सीरिया से जुड़े सवाल बताते हैं कि परमाणु ऊर्जा के विस्तार के साथ अंतरराष्ट्रीय निगरानी और सुरक्षा पर ध्यान देना भी जरूरी होगा।