एलियन शहरों को भी देखना होगा आसान
इतना ही नहीं, अगर ग्रहों की सतह पर अगर कोई शहर मौजूद है, तो हमें नजर आएगा। नासा सूर्य और धरती के बीच मौजूद दूरी से करीब सैकड़ों गुना दूर है। सूर्य को टेलीस्कोप बनाने के लिए जिस तकनीक को अंतरिक्ष में सेट करने की बात हो रही है, उसे 650 एस्ट्रोनॉमिकल यूनिट पर रखना होगा।
सौर हवा की मदद से होगा संभव
एजेंसी का मानना है कि एक छोटा टेलीस्कोप बनाकर इस दूरी को तय करने के लिए भेजा जाए। तब भी इसे वहां तक पहुंचने में 25 साल लग जाएंगे। इस काम में मदद के लिए सौर हवा की मदद ली जाएगी। इससे यह यान सूर्य के बेहद नजदीक पहुंच जाएगा।
2034 तक पूरा करने का लक्ष्य
नासा के जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी की साइंटिस्ट डॉ. स्लावा तुरिशेव ने कहा कि यह प्रोजेक्ट बेहद महत्वाकांक्षी है। असंभव लगता है लेकिन है नहीं। इसे किया जा सकता है। हमारा उद्देश्य है कि हम इसे 2034 तक पूरा कर लेंगे। इसके बाद दूसरी दुनिया के ग्रहों, वहां रह रहे जीवों, प्रजातियों आदि के बारे में जानकारी जमा करेंगे।
धरती की सुरक्षा के लिहाज से अहम
यह जानना जरूरी है कि ब्रह्मांड में ऐसे और कौन से ग्रह हैं, जहां पर इंसानों जैसे या उससे बेहतर सभ्यता रह रही है। क्या वो भविष्य में हमारी मदद करेंगे। या हम पर हमला करेंगे। धरती को बचाने और संवारने के लिए उनके बारे में जानना बेहद जरूरी है।