नासा के ओसिरिस-रेक्स अंतरिक्ष यान ने एस्टेरॉयड बेन्नू पर किया गड्ढा
- फोटो : नासा
राष्ट्रीय एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) का अंतरिक्ष यान 20, अक्टूबर, 2020 को एक एस्टेरॉयड पर भेजा गया था। इसके पहले नासा ने साल 2019 में भी अपने यान को एस्टेरॉयड से नमूने लाने के लिए भेजा था। वहीं, अब नासा ने बृहस्पतिवार को दोनों ही साल की एस्टेरॉयड की तस्वीरें जारी की है। तस्वीर में यह साफ दिख रहा है कि नासा के यान के एस्टेरॉयड पर उतरने और नमूने लने के कारण इसकी सतह में कुछ गड़बड़ी हुई है।
एस्टेरॉयड की सतह पर दबाव
बता दें, इन दोनों ही साल में नासा ने बेन्नू नाम के एस्टेरॉयड पर ओसिरिस-रेक्स अंतरिक्ष यान को भेजा था। इसके बाद इस यान को हाल ही में सात अप्रैल 2021 को भी भेजा गया, ताकि यान द्वारा एस्टेरॉयड पर की गई गड़बड़ी की तस्वीर ली जा सके। तस्वीर में साफ देखा जा सकता है कि यान के नमूने एकत्र करने की प्रक्रिया में एस्टेरॉयड की सतह क्षतिग्रस्त हो गई। तस्वीर में एस्टेरॉयड की सतह पर दबाव भी साफ दिखाई पड़ रहा है।
2023 में पृथ्वी पर वापस लौटेगा ओसिरिस-रेक्स
नासा द्वारा उपलब्ध कराए गए चित्रों को ध्यान से देखने पर पता चलता है कि ओसिरिस-रेक्स अंतरिक्ष यान ने साल 2020 को एस्टेरॉयड का नमूना लेते समय बेन्नू की सतह पर किस तरह से एक गड्ढा बना दिया। जानकारी के अनुसार ओसिरिस-रेक्स बेन्नू की सतह से नमूने लेकर अगले माह मई में चलेगा और साल 2023 में पृथ्वी पर वापस पहुंचेगा।
एस्टेरॉयड का अध्ययन कर रहे वैज्ञानिक
गौरतलब है कि एस्टेरॉयड बेन्नू पृथ्वी से 182 मिलियन मील (293 मिलियन किलोमीटर) की दूरी पर है। एस्टेरॉयड के अध्ययन से खगोलविद
ब्रह्मांड के कई राज सुलझाने में लगे हुए हैं। फिलहाल,
बेन्नू के नमूनों का अध्ययन करके, वैज्ञानिक बेहतर तरीके से यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि हमारे सौर मंडल के ग्रह कैसे बने और अगर कोई एस्टेरॉयड पृथ्वी को खतरे में डालता है तो लोग इससे कैसे बच सकते हैं।