वैज्ञानिकों ने मंगल पर भेजे गए ऑर्बिटर और अन्य उपग्रहों से मिले आंकड़ों के अध्ययन के बाद ये दावा किया है। स्केलर का कहना है कि मंगल ग्रह पर कुछ पानी खत्म हुआ होगा या गायब हो गया होगा लेकिन अधिकतर पानी अभी भी ग्रह पर ही है। वैज्ञानिकों ने ग्रह के उल्कापिंडों का इस्तेमाल करके पानी के अहम भाग हाईड्रोजन पर अधिक ध्यान दिया और नतीजे पर पहुंचे हैं।
वातावरण में बदलाव से जल प्रभावित
केक इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस स्टडीज के एसोसिएट डायरेक्टर प्रो. बेथानी एलहमन का कहना है कि वातावरण में बदलाव या किसी तरह के नुकसान का सीधा असर पानी पर पड़ता है। पिछले कई दशकों से मंगल मिशन में पता चला है कि मंगल ग्रह पर प्राचीन हाईड्रेटेड खनिज का बड़ा भंडारण है जिसकी संरचना लगातार बदल रही है क्योंकि पानी कम हो रहा है।