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नासा की रिपोर्ट में खुलासा, वायु प्रदूषण से हलकान दुनिया की 51 फीसदी आबादी, जानें क्यों

Fri, 10 Jul 2020 02:32 AM IST
योगेश साहू अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
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वायु प्रदूषण (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : PTI
दुनिया की आधी से अधिक आबादी वायु प्रदूषण और उसकी गुणवत्ता से परेशान है। ऐसा वायु गुणवत्ता पर किसी आधिकारिक सरकारी डाटा न होने की वजह से है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया में 10 में से नौ लोग प्रदूषित हवा में सांस ले रहे हैं।
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वायु प्रदूषण (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : PTI
ऐसे में पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य की दृष्टि से भी वायु प्रदूषण के हालात का आकलन करना बेहद जरूरी है। इन विशाल वैश्विक असमानताओं पर नासा ने एक अभियान के तहत ओपन एक्यू पर रिपोर्ट जारी की है।
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वायु प्रदूषण (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : PTI
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया के ज्यादातर देशों में हवा में जहरीले तत्वों का गंभीरता से आकलन नहीं किया जा रहा है। ओपन एक्यू प्रणाली का उपयोग नासा द्वारा किया जाता है और नासा के वैज्ञानिकों ने इस अध्ययन का समर्थन किया है।

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वायु प्रदूषण (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : PTI
ओपन एक्यू की प्रणाली के पास वायु प्रदूषण पर नासा के उपग्रह डेटा को मिलाकर दुनिया में सभी देशों के लिए वायु गुणवत्ता की जानकारी लाने की क्षमता है। ओपन एयर क्वालिटी डाटा द ग्लोबल स्टेट ऑफ प्ले के शीर्षक वाले इस अध्ययन में 212 देशों की जांच की गई। 
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वायु प्रदूषण (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : PTI
इस जांच में पाया गया कि 109 (51 फीसदी) देशों की वायु प्रदूषण के लिए सरकारी एजेंसियां प्रभावी ढंग से काम नहीं कर रही हैं। देशों की वायु प्रदूषण के लिए सरकारी एजेंसियां प्रदूषण की सही स्थिति का आकलन करके सही आंकडे़ नहीं दे रही हैं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI
इसके चलते हवा में जहर घोलने वाले मुख्य प्रदूषक तत्वों और वायु गुणवत्ता को दर्शाता डाटा नहीं संकलित किया जा रहा। इन 109 देशों में चीन, भारत, रूस, फिलीपींस, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसी प्रमुख शक्तियां भी शामिल हैं।  
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