अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव की स्पीकर नैंसी पेलोसी ने अपनी एशिया यात्रा के कार्यक्रम में ताइवान का जिक्र नहीं किया। इसके बावजूद ये कयास जारी हैं कि पेलोसी गुपचुप ताइवान जा सकती हैं। पेलोसी ने पिछले हफ्ते एलान किया था कि एशिया यात्रा के दौरान वे ताइवान भी जाएंगी। इसको लेकर अमेरिका और चीन के बीच टकराव काफी बढ़ गया। उसे संभालने की कोशिश में पिछले गुरुवार को राष्ट्रपति जो बाइडन ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से फोन पर सवा दो घंटे बातचीत की थी।
समझा जाता है कि बाइडन प्रशासन के आग्रह पर ही पेलोसी ने अपनी एशिया यात्रा का कार्यक्रम जारी करते समय उसमें ताइवान का उल्लेख नहीं किया। लेकिन अब इसको लेकर विपक्षी रिपब्लिकन पार्टी ने बाइडन प्रशासन पर निशाना साध लिया है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में अमेरिकी विदेश मंत्री रहे माइकल पोम्पियो ने कहा है कि पेलोसी के ताइवान न जाने से अमेरिका के सहयोगी देशों को बहुत खराब संदेश जाएगा।
रविवार को जारी अपने बयान में नैंसी पेलोसी ने बताया कि अपनी यात्रा के दौरान वे सिंगापुर, मलेशिया, दक्षिण कोरिया और जापान जाएंगी। पेलोसी के साथ हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव के कई सदस्य भी हैं, जिनमें सदन की समितियों के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष शामिल हैं।
राष्ट्रपति जो बाइडन ने पेलोसी के ताइवान जाने के इरादे पर सार्वजनिक रूप से असहमति जताई थी। बताया जाता है कि अमेरिकी सेना के बड़े अधिकारियों ने भी सलाह दी थी कि पेलोसी का ताइवान जाना सही कदम नहीं होगा। माइकल पोम्पियो ने इसी खबर पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा- ‘शी जिनपिंग से फोन पर बातचीत के बाद बाइडन प्रशासन चीनी प्रचार से डर गया।’ उन्होंने कहा- इससे सचमुच उस क्षेत्र में हमारे मित्र देशों- ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया और जापान को बहुत खराब संदेश जाएगा।
चीन ने चेतावनी दी है कि अगर पेलोसी ताइवान गईं, तो वह किसी भी हद तक जा सकता है। चीन के सरकार समर्थक अखबार ग्लोबल टाइम्स ने एक रिपोर्ट में यहां तक कहा कि चीनी सेना के विमान पेलोसी के विमान को आसमान में ही घेर कर उसे चीन की मुख्य भूमि पर उतार सकते हैं या फिर उसे हवा में खदेड़ सकते हैं।
विश्लेषकों के मुताबिक बाइडेन प्रशासन इस बात से वाकिफ है कि अमेरिका ने बार-बार अपनी वन चाइना पॉलिसी दोहराई है। इसका मतलब चीन की इस राय को स्वीकार करना है कि ताइवान उसका हिस्सा है। इसके साथ ही अमेरिका यह भी कहता रहा है कि वह जबरन ताइवान की मौजूदा स्थिति को बदलने की चीन की कोशिश को स्वीकार नहीं करेगा। लेकिन अभी अमेरिकी मीडिया में ये चर्चा तेज है कि अगर पेलोसी ताइवान गईं, तो इस मौके का फायदा उठा कर चीन जबरन इस द्वीप को अपने में मिला लेने की तरफ बढ़ सकता है।
विश्लेषकों के मुताबिक ताइवान जाने के पेलोसी के एलान से बाइडन प्रशासन के लिए बड़ी दुविधा पैदा हुई है। अब अगर वे बिना ताइवान गए, एशिया यात्रा से लौट आईं, तो इसे चीन की धमकियों की जीत माना जाएगा। इसका पूरा फायदा रिपब्लिकन पार्टी उठाएगी। जबकि अगर पेलोसी वहां गईं, तो युद्ध छिड़ने का वास्तविक खतरा है, जिसे बाइडन प्रशासन टालना चाहता है।