पुलिस ने बताया कि 5x3.5-सेंटीमीटर (1.95x1.2-इंच) के क्यूआर कोड वाले स्टीकर को स्कैन करने पर कब्र में दफन व्यक्ति का नाम और कब्रिस्तान में उसका स्थान पता चलता है। इसके अलावा कोई अन्य जानकारी नहीं मिल रही है। क्यूआर कोड किसने, कब और क्यों लगाए गए हैं, इसे लेकर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
जर्मनी के म्यूनिख शहर के तीन कब्रिस्तानों में एक हजार से ज्यादा कब्र और लकड़ी के क्रॉस पर क्यूआर कोड लगे रहस्यमयी स्टीकर लगाए गए हैं। क्यूआर कोड किसने, कब और क्यों लगाए गए हैं, इसे लेकर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने बताया कि 5x3.5-सेंटीमीटर (1.95x1.2-इंच) के क्यूआर कोड वाले स्टीकर को स्कैन करने पर कब्र में दफन व्यक्ति का नाम और कब्रिस्तान में उसका स्थान पता चलता है। इसके अलावा कोई अन्य जानकारी नहीं मिल रही है।
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पुलिस प्रवक्ता क्रिश्चियन ड्रेक्सलर ने बताया कि इसके पीछे हमें कोई पैटर्न नहीं मिला है। ये स्टीकर्स पुरानी और नई दोनों कब्रों पर लगाए गए हैं। जिन कब्रों पर लेकर लकड़ी का क्रॉस लगा है, उन पर भी स्टीकर्स लगे हैं। ये स्टिकर वाल्डफ्रीडहोफ, सेंडलिंगर फ्रीडहोफ और फ्रीडहोफ सोल्न कब्रिस्तानों में लगाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि अगर किसी ने कब्रों पर स्टीकर्स लगाते हुए किसी व्यक्ति को देखा है तो वे इसकी सूचना कब्रिस्तान प्रशासन को दे सकते हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इसके पीछे कौन है? इसके अलावा पुलिस संपत्ति के नुकसान की भी जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि जब कब्रों पर लगे स्टिकर हटाए गए तो उन पर लगे पत्थर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गए और उनका रंग उड़ गया।
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एएफडी पार्टी के खिलाफ सड़कों पर उतरे थे 30 हजार लोग
जर्मनी के आम चुनाव को एक सप्ताह रह गया है। इससे पहले धुर दक्षिणपंथी अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (एएफडी) के खिलाफ लोग सड़कों पर आ गए थे। रविवार को बर्लिन में करीब 30 हजार लोगों ने पार्टी के खिलाफ प्रदर्शन किया और निष्पक्ष चुनाव की मांग की थी। पिछले सप्ताहांत म्यूनिख में भी इसी तरह के एक प्रदर्शन में सवा लाख लोग शामिल हुए थे। कई लोगों नेअल्टरनेटिव फॉर जर्मनी की निंदा करते हुए नारे लिखी तख्तियां ले रखी थीं।