म्यांमार की सेना ने सैनिक शासन के प्रति वफादार नागरिकों को हथियार रखने की इजाजत देने का फैसला किया है। स्थानीय मीडिया में आई खबरों में इसे प्राइवेट आर्मी बनाने की कोशिश बताया गया है। अनुमान लगाया गया है कि सैनिक शासन पूर्व सैन्यकर्मियों और अपने समर्थक समुदायों को हथियारबंद करेगी। उन लोगों की सेवा सैनिक शासन विरोधी विद्रोही गुटों के साथ लड़ाई में ली जा सकती है।
मीडिया में 31 जनवरी को जारी हुआ एक दस्तावेज अब प्रकाशित हुआ है। बताया गया है कि यह दस्तावेज म्यांमार के गृह मंत्रालय ने जारी किया है। इसमें कहा गया है कि 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को हथियार और गोलाबारूद लेकर चलने का लाइसेंस दिया जा सकता है। यह लाइसेंस उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए मिलेगा, लेकिन इस सुविधा का उन्हें उस समय तक ही लाभ मिलेगा, जब तक वे सरकार के प्रति वफादार रहेंगे।
इस दस्तावेज के मुताबिक अब सुरक्षा बलों के साथ-साथ विद्रोही समूहों से लड़ने वाले गुटों और मिलिशिया को भी ऑटोमैटिक राइफलों और सब-मशीगन रखने का अधिकार मिलेगा। लेकिन यह अधिकार पाने के लिए उन्हें इस शर्त पर हामी भरनी होगी कि सरकार जब कभी उन्हें ‘कानून लागू करने संबंधी गतिविधि’ में शामिल होने के लिए बुलाएगी, वे उस आदेश का पालन करेंगे।
समझा जाता है कि इस योजना के तहत सेना समर्थक मिलिशिया पयू साव हती को हथियारों से लैस किया जाएगा। इस मिलिशिया को पूरे म्यांमार में फैल रही हथियारबंद बगावत का मुकाबला करने के लिए तैनात किए जाने का अनुमान है। जबकि आलोचकों का कहना है कि सैन्य शासन के इस निर्णय से देश में जारी गृह युद्ध में और तेजी आ सकती है। इससे देश में हिंसा का माहौल और गंभीर रूप ले सकता है।
जिस दस्तावेज की खबर म्यांमार के मीडिया में आई है, देश के गृह मंत्रालय ने उसे औपचारिक रूप से जारी नहीं किया है। लेकिन वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने इस बारे में मीडिया में दिए गए ब्योरे की पुष्टि की है। प्रवक्ता ने कहा- बहुत से नागरिक खुद ही हथियार की मांग कर रहे हैं। ऐसे बहुत से नागरिकों को बागी गुटों ने निशाना बनाया है, जिनके संबंध सेना के साथ हैं।
विश्लेषकों के मुताबिक म्यांमार की सैन्य सरकार ने देश में कानून-व्यवस्था बहाल करने को अब अपनी प्राथमिकता बना ली है। वह अगस्त में होने वाले चुनाव से पहले देश में आम स्थिति बहाल होने का संकेत देना चाहती है। इस कोशिश के तहत देश के 330 में से 37 शहरों में बीते एक फरवरी को मार्शल लॉ लागू कर दिया गया। अब उसी दिशा में कदम उठाते हुए नागरिकों को हथियारों से लैस करने की योजना पेश की गई है।
म्यांमार में सेना ने एक फरवरी 2021 को निर्वाचित प्रतिनिधियों को जेल में डालते हुए सत्ता पर कब्जा जमा लिया था। तब से सैनिक सरकार को देश में बड़े जन विरोध का सामना करना पड़ा है। पिछले साल देश के कई हिस्सों में हथियारबंद विद्रोह फैल गया। सेना ने उसे दबाने में अपनी पूरी ताकत लगाई है, लेकिन उसे अभी तक इस दिशा में कोई खास कामयाबी नहीं मिली है।