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Myanmar: म्यांमार की वायुसेना में रूस और चीन के विमान-हेलिकॉप्टर्स हुए शामिल, अब अभियान तेज करेगी सेना?

Wed, 12 Nov 2025 04:41 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बैंकॉक।

सार

Myanmar: म्यांमार ने रूस के हेलीकॉप्टर और चीन के विमान अपनी वायुसेना में शामिल किए हैं। दोनों देश अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद उसे सैन्य मदद दे रहे हैं। इन नए विमानों से म्यांमार की सेना की वायु सीमा सुरक्षा और अभियानों की क्षमता बढ़ेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम दिखाता है कि म्यांमार की सेना कूटनीतिक दबावों की परवाह किए बिना वायु शक्ति पर और अधिक निर्भर हो रही है।
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म्यांमार के सैन्य शासक मिन ऑन्ग लैइंग। - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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म्यांमार ने अपनी वायुसेना में रूस के हेलिकॉप्टर और चीन के विमान शामिल किए हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब ये दोनों देश अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद म्यांमार के सैन्य शासन को हथियार और उपकरण मुहैया करा रहे हैं, ताकि देश में जारी खूनी गृहयुद्ध को समाप्त किया जा सके।  
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प्रतिबंधों के बावजूद हथियार मुहैया करा रहे चीन-रूस
अमेरिका, यूरोपीय संघ और अन्य देशों ने म्यांमार पर प्रतिबंध लगाए हैं, जिनमें हथियारों की बिक्री पर रोक भी शामिल है। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, रूस और चीन लगातार म्यांमार की सेना को सैकड़ों मिलियन डॉलर मूल्य के हथियार और उपकरण दे रहे हैं।

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सीमा सुरक्षा सुनिश्चित करने की क्षमता बढ़ाएंगे विमान-हेलिकॉप्टर्स: सेना
सेना की ओर से जारी तस्वीरों में तीन रूसी एमआई-38टी हेलिकॉप्टर और दो चीनी वाई-8 विमान दिखाए गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इनका इस्तेमाल पर्वतीय इलाकों में सैनिकों को भेजने के अभियानों में किया जाएगा। सेना ने कहा कि परिवहन विमान म्यांमार की वायु सीमा की सुरक्षा सुनिश्चित करने की क्षमता बढ़ाएगा। इन विमानों को सात नवंबर को राजधानी नेपीडॉ में आयोजित एक समारोह में शामिल किया गया।

कूटनीतिक दबावों के बावजूद हथियार खरीद रही सेना
म्यांमार के शीर्ष सैन्य शासक जनरल मिन आंग ह्लाइंग ने कहा, मौजूदा अंतरराष्ट्रीय संघर्ष और आंतरिक हालात स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि सभी प्रकार के विमानों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है। सिंगापुर स्थित अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक अध्ययन संस्थान (आईआईएसएस) के विश्लेषक मॉर्गन माइकल्स ने कहा,  रूस से मिल रहे नए हेलिकॉप्टर्स और विमानों की आपूर्ति दिखाती है कि आर्थिक और कूटनीतिक दबावों के बावजूद म्यांमार की सेना अब भी जरूरी उपकरण हासिल कर रही है और रूस इसके लिए जीवनरेखा बना हुआ है। 

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'अब अभियानों को तेज करेगी सेना'
रक्षा खुफिया कंपनी 'जेंस' के मुताबिक, म्यांमार रूस के निर्यात का पहला ज्ञात ग्राहक है जिसने एमआई-38टी हेलिकॉप्टर खरीदे हैं। सैन्य मामलों पर नजर रखने वाले 'मिलिटरी एक्सपर्टीज फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म' समूह ने कहा कि सेना की यह तैयारी दिखाती है कि वह वायु शक्ति पर और अधिक निर्भर करेगी और देशभर में अपने अभियानों को तेज करेगी। यह संगठन उन पूर्व सैन्य अधिकारियों का है जो अब लोकतंत्र समर्थक आंदोलन का हिस्सा हैं।

साल 2021 में सेना ने आंग सान सू ची की लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार से सत्ता छीन ली थी, जिसके बाद पूरे देश में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन हुए। इन प्रदर्शनों को हिंसा के जरिए कुचला गया, तो कई नागरिकों ने हथियार उठा लिए और देश अब एक गृहयुद्ध में फंस गया है। सेना ने भारी हथियारों और वायु शक्ति के सहारे कई इलाकों पर फिर से नियंत्रण हासिल किया है। हालांकि देश के बड़े हिस्से पर अब भी लोकतंत्र समर्थक पीपुल्स डिफेंस फोर्स और जातीय विद्रोही समूहों का कब्जा है, जो दशकों से स्वायत्तता की मांग कर रहे हैं।

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