अंतरराष्ट्रीय आलोचनाओं और देश विद्रोही समूहों के बढ़ रहे हमलों की परवाह न करते हुए म्यांमार के सैनिक शासन ने अगस्त 2023 में नया चुनाव कराने की तैयारी शुरू कर दी है। सैनिक शासन का दावा है कि उन चुनावों के बाद देश में ऐसा ‘बहु दलीय अनुशासित लोकतंत्र’ बहाल हो जाएगा, जिसमें सेना की भूमिका मार्गदर्शक होगी। सैनिक शासन ने मतदाता सूची नए सिरे से तैयार करने की मुहिम छेड़ दी है। इसके अलावा चुनाव क्षेत्रों के परिसीमन की योजना भी पेश की गई है। जानकारों का कहना है कि चुनाव क्षेत्रों को चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने के मकसद से नया रूप दिया जा रहा है।
इस बीच देश के कई इलाकों में बागी गुटों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई भी तेजी से चलाई जा रही है। वेबसाइट एशिया टाइम्स पर छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक आम तौर पर मई से अक्तूबर के बीच मानसून सीजन में सैनिक कार्रवाई धीमी हो जाती थी। लेकिन इस वर्ष इसमें कोई ढिलाई नहीं बरती गई है। जबकि इस बार मानसून की बारिश सामान्य से अधिक तेज रही है। जुलाई और अगस्त दोनों महीनों में भारी बारिश के बीच सेना ने हेलीकॉप्टरों और लड़ाकू विमानों से विद्रोहियों के ठिकानों पर गोलीबारी और बमबारी जारी रखी।
इसी बीच सैनिक शासन ने सरकार समर्थक हथियारबंद गुट प्यू साव हती को बेहतर ढंग से संगठित किया है। उसे सैनिक सरकार ने अब आर्म्ड पीपुल्स सिक्योरिटी टीम (पीएसटी) नाम दिया है। बताया जाता है कि इन हथियारबंद दलों में पूर्व सैनिक, फायर सर्विस के कर्मी, कट्टरपंथी बौद्ध गुटों से आए नौजवान और सेना समर्थक राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता शामिल किए गए हैं। पीएसटी को संगठित करने का मकसद आम सुरक्षा ड्यूटी से सैनिकों को मुक्त करना बताया गया है।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक सेना की इन तमाम कोशिशों के बावजूद विद्रोही गुटों की गतिविधियों में ज्यादा गिरावट नहीं आई है। एक अनुमान के मुताबिक सुदूर उत्तरी स्थल पुताओ से लेकर सुदूर दक्षिणी कावथाउंग तक फैले म्यांमार के सीमाई इलाकों में विद्रोही गुटों ने अपने को फैला लिया है। बताया जाता है कि इन गुटों में एक लाख से अधिक लड़ाके शामिल हो चुके हैं। इन सैनिक शासन विरोधी गुटों ने पीपुल्स डिफेंस फोर्सेज (पीडीएफ) से अपना मोर्चा बना रखा है। खबरों के मुताबिक 2022 के पहले छह महीनों में इन बागी गुटों के हमलों में लगभग दस हजार सैनिक मारे जा चुके हैं। वेबसाइट एशिया टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक औसतन रोज 20 से 25 सैनिक बागी गुटों के हमले में हताहत हो रहे हैं।
कई लीक हुए सरकारी दस्तावेजों से पता चला है कि एक फरवरी 2021 को हुए सैनिक तख्ता पलट के बाद से सेना में भर्ती होने वाले नौजवानों की संख्या में बड़ी गिरावट आई है। खास कर जूनियर और नॉन कमीशंड अधिकारी जैसे कई पद भर्ती ना होने पाने के कारण खाली पड़े हुए हैं। कुछ पर्यवेक्षकों का अनुमान है कि इसी समस्या के कारण सैनिक शासन ने पीएसटी का गठन किया है।
उधर पीडीएफ ने सेना को निशाना बनाने के लिए घातक विस्फोटकों (आईईडी) का इस्तेमाल बढ़ा दिया है। उसने शहरी इलाकों में भी इन विस्फोटकों का इस्तेमाल किया है। पीडीएफ की गतिविधियों के विश्लेषक मैथ्यू ऑर्नॉल्ड ने एशिया टाइम्स के कहा कि खास कर मंडाले-मोनीवा धुरी अब आईईडी एवेन्यू (मार्ग) के रूप में जानी जा रही है। वहां ऐसे हमले सबसे अधिक संख्या में हुए हैं।