मलयेशिया की म्यांमार के प्रवासियों को वापस भेजने की तैयारी से रोहिंग्या शरणार्थियों में दहशत का माहौल। गृहयुद्ध, धार्मिक उत्पीड़न से बचकर भागे इन लोगों का कहना है कि अच्छा होगा उन्हें मार दिया जाए। एक साल से मलयेशिया में रह रही रोहिंग्या समुदाय की युवती बिबी ने कहा, हर कोई हाई अलर्ट पर है। हम अधिकारियों और आम जनता से डरे हुए हैं।
मोहिदुजमान धार्मिक उत्पीड़न और गृहयुद्ध से बचने के लिए दो साल पहले अपने देश म्यांमार से भाग निकला था। करीब चार महीने तक जमीनी रास्ते और समंदर का सफर तय करने के बाद मलयेशिया पहुंचा। धान के खेत में काम ढूंढ़ा और पारंपरिक मलय शैली में बने झोपड़ीनुमा घर में रहने लगा। लेकिन अब मलयेशिया के ऐसे प्रवासियों को वापस भेजने की तैयारी से रोहिंग्या शरणार्थियों में भय का माहौल है।
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भाई मोहम्मद ने बताया कि मोहिदुजमान (35) ने मलयेशिया में संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी के पास शरणार्थी के रूप में पंजीकरण के लिए आवेदन किया था और अपनी बारी का इंतजार कर रहा था। इसी बीच, उसे कुछ समय पहले गिरफ्तार कर डिटेंशन सेंटर में डाल दिया गया था। कुआलालंपुर में रहने वाले और शरणार्थी का दर्जा रखने वाले मोहम्मद (25) ने अपने भाई के मामले पर कहा, म्यांमार वापस भेजने से तो बेहतर है कि हमें मलेशिया में ही मार दिया जाए। वापस भेजे जाने पर वहां जाकर भी मारा ही जाएगा, क्योंकि म्यांमार का सैन्य शासन उसे लड़ने के लिए सीधे युद्ध के मोर्चे पर भेज देगा।
मोहिदुजमान म्यांमार के करीब 10 हजार ऐसे प्रवासियों में शामिल हैं जिनके पास शरणार्थी होने कोई दस्तावेज नहीं है। पिछले महीने मलयेशिया ने लगभग आधे प्रवासियों को वापस उनके देश भेजने की योजना की घोषणा की है। प्रवासियों, उनके परिवारों और मानवाधिकार समूहों का कहना है कि एक बार म्यांमार लौटने पर वहां की सैन्य सरकार उन सभी को सेना में अनिवार्य रूप से भर्ती कर लेगी। रोहिंग्याओं को तो सबसे बुरे की आशंका है जो अपने ही देश में अलग-थलग हैं और उस हिंसा को झेल चुके है जिसे संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका ने म्यांमार सेना का नरसंहार करार दिया है।
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शरणार्थी दर्जे के बावजूद स्थिति बुरी
पिछले एक दशक में म्यांमार से लाखों लोगों ने जातीय सफाये और क्रूर सैन्य शासन से बचने की उम्मीद में मलयेशिया में शरण ली है। हजारों लोगों के पास शरणार्थी का दर्जा है, फिर भी उन्हें लगातार बढ़ रहे भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है। नजरबंदी केंद्रों में बिना कागजात वाले सैकड़ों प्रवासियों की मौत हो चुकी है।
1500 लोग अगले माह वापस भेजे जाएंगे
मलेशिया के गृह मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को एक बयान में कहा कि प्रवासियों का आना एक बड़ा वित्तीय बोझ बन गया है, जिससे गंभीर सामाजिक समस्याएं पैदा हुई हैं और देश के लिए एक वास्तविक सुरक्षा खतरा पैदा हो गया है। सरकार हिरासत केंद्रों में बंद लगभग 1,500 प्रवासियों को अगले माह म्यांमार वापस भेजने की तैयारी कर रही है। एक प्रमुख गैर-लाभकारी संगठन नेशनल ह्यूमन राइट्स सोसाइटी के अध्यक्ष रामासेलवम मणिमुथु ने इस बात पर आपत्ति जताई कि नजरबंद लोगों को शरणार्थी के रूप में पंजीकृत होने का विकल्प दिए बिना निकाला जा रहा है।