Myanmar Election: म्यांमार जनरल मिन आंग हलिंग
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बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच अब खबर है कि म्यांमार का सैनिक शासन देश के चुनाव कानून में बदलाव की तैयारी कर रहा है। बदलाव इस रूप में करने की योजना बनाई गई है, जिससे सेना समर्थित यूनियन सॉलिडरिटी एंड डेवलपमेंट पार्टी (यूएसडीपी) की जीत सुनिश्चित हो जाए। सैनिक शासकों की तरफ से संकेत दिए गए हैं कि अगले साल यानी 2023 में देश चुनाव कराए जा सकते हैं।
एक रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव प्रणाली में बदलाव के बाद अभी की तरह चुनाव क्षेत्रों से प्रत्यक्ष ढंग से निर्वाचन नहीं होगा। बल्कि आनुपातिक प्रतिनिधित्व का सिस्टम लागू किया जाएगा। नवंबर 2020 में हुए आम चुनाव में आंग सान सू ची के नेतृत्व वाली पार्टी नेशनल लीड फॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी) 83 फीसदी चुनाव क्षेत्रों में विजयी रही थी। जबकि उसे वोट सिर्फ 68 फीसदी मिले थे। उधर यूएसडीपी को 22 फीसदी वोट मिले, लेकिन वह केवल सात फीसदी सीटें ही जीत पाई थी। इसलिए सैनिक शासकों में समझ बनी है कि अगर आनुपातिक प्रतिनिधित्व की प्रणाली अपना ली जाए, तो यूएसडीपी को फायदा होगा।
म्यांमार में पहले से मौजूद प्रावधान के मुताबिक संसद की 25 फीसदी सीटें सेना के प्रतिनिधियों को आवंटित की जाती हैं। इस तरह अगर 2020 के चुनाव की तरह यूएसडीपी 22 सीटें भी हासिल हुईं, तो सेना समर्थक सांसदों की संख्या 47 फीसदी हो जाएगी। अगर यूएसडीपी अपने वोट फीसदी को 29 फीसदी तक ले जाने में कामयाब रही, तो उसे स्पष्ट बहुमत मिल जाएगा। पर्यवेक्षकों के मुताबिक अगर चुनाव सैनिक शासन की देखरेख में होते हैं, तो सेना अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर या धांधली का सहारा लेकर यूएसडीपी को कम से कम 30 फीसदी वोट दिलवाने में सफल रहेगी।
म्यांमार के संविधान के मुताबिक राष्ट्रपति का चुनाव वहां संसद के सदस्य करते हैं। अगर यूएसडीपी और सेना समर्थक अन्य सदस्यों की संख्या 50 फीसदी से ज्यादा हुई, तो मौजूदा सैनिक तानाशाह मिन आंग हलायंग का राष्ट्रपति चुना जाना पक्का हो जाएगा। उस स्थिति में मिन खुद को निर्वाचित और संवैधानिक राष्ट्रपति के रूप मे दुनिया के सामने पेश कर पाएंगे।
म्यांमार के सैनिक शासन ने पिछले महीने लोकतंत्र समर्थक चार कार्यकर्ताओं को फांसी पर लटका दिया। उसके बाद से उसकी अंतरराष्ट्रीय आलोचना और तेज हो गई है। हाल ही में कंबोडिया के राष्ट्रपति और दस दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संघ आसियान के अध्यक्ष हुन सेन ने मिन आंग हलायंग को बेहद सख्त भाषा में पत्र लिखा। इसके पहले हुन सेन म्यांमार के सैनिक शासकों से संवाद बनाए रखने के समर्थक थे। लेकिन इस पत्र में उन्होंने लिखा- कार्यकर्ताओं को मृत्युदंड दिए जाने से आसियान के सभी सदस्य बेहद निराश हुए हैं। अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और नेताओं ने भी सैनिक शासन के इस कदम की कड़ी निंदा की।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते अलगाव के बीच ही सैनिक शासन ने नए चुनाव के संकेत देने शुरू किए हैं। उसकी तरफ से फिर दावा किया गया है कि 2020 के चुनाव में एनएलडी की जीत धांधली के कारण हुई थी। इसीलिए सेना ने फरवरी 2021 में एनएलडी को दोबारा सत्ता में आने के रोका। सैनिक शासकों ने दावा किया है कि वे अपनी देखरेख में चुनाव करवा कर देश में लोकतंत्र को वापस लाएंगे।