म्यांमार में सैन्य सरकार की देखरेख में पहली बार हो रहे आम चुनाव के पहले चरण के लिए रविवार को मतदान हुआ। जनवरी के अंत में मतदान के दो और चरणों का मदतान होगा, इसके बाद फरवरी में चुनाव नतीजे घोषित किए जाएंगे। व्यापक रूप से यह संभावना जताई जा रही है कि 2021 में सेना के सत्ता पर काबिज होने के बाद से देश का शासन संभाल रहे जनरल मिन आंग ह्लाइंग राष्ट्रपति पद ग्रहण करेंगे।
म्यांमार में सैन्य शासन लागू होने के बाद पहली बार आम चुनाव कराए जा रहे हैं। सैन्य सरकार की देखरेख में रविवार को आम चुनाव के पहले चरण के तहत मतदान हुआ। दो अन्य चरणों का मतदान जनवरी के अंत तक पूरा होगा, जबकि अंतिम नतीजों की घोषणा फरवरी तक किए जाने की संभावना है।
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चुनाव विश्लेषकों के मुताबिक, सेना समर्थित यूनियन सॉलिडैरिटी एंड डेवलपमेंट पार्टी (यूएडीपी) की जीत की संभावना जताई जा रही है। यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि 2021 में सेना के सत्ता में आने के बाद से देश का शासन संभाल रहे जनरल मिन आंग ह्लाइंग राष्ट्रपति पद संभाल सकते हैं।
लोकतंत्र की वापसी का दावा, लेकिन वैधता पर सवाल
सैन्य सरकार इन चुनावों को देश में चुनावी लोकतंत्र की वापसी के रूप में पेश कर रही है। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि यह प्रक्रिया सैन्य शासन को वैध दिखाने का प्रयास मात्र है। संयुक्त राष्ट्र, मानवाधिकार संगठनों और कई देशों ने प्रमुख विपक्षी दलों की गैर-मौजूदगी में हो रहे इस चुनाव को अनुचित करार दिया है। गौरतलब है कि फरवरी 2021 में म्यांमार की सेना ने आंग सान सू ची के नेतृत्व वाली चुनी हुई सरकार को सत्ता से हटाकर सैन्य शासन लागू कर दिया था।
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तीन चरणों में मतदान, 102 टाउनशिप में पहला चरण
देश के सबसे बड़े शहर यांगून, राजधानी नेपीता और अन्य इलाकों में मतदाताओं ने स्कूलों, सरकारी भवनों और धार्मिक स्थलों में मतदान किया। कुल 330 टाउनशिप में से 102 में पहले चरण का मतदान कराया गया। दूसरा चरण 11 जनवरी और तीसरा चरण 25 जनवरी को प्रस्तावित है। इस चुनाव में 57 राजनीतिक दलों के 4,800 से अधिक उम्मीदवार राष्ट्रीय और क्षेत्रीय विधानमंडलों के लिए मैदान में हैं। हालांकि, केवल छह दल ही ऐसे हैं जो देशव्यापी स्तर पर चुनाव लड़ रहे हैं और संसद में प्रभावी भूमिका निभाने की स्थिति में हैं।
प्रमुख दल बाहर, परिणामों पर संदेह
आलोचकों का आरोप है कि प्रमुख राजनीतिक दलों को चुनावी प्रक्रिया से बाहर रखा गया है, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सख्त पाबंदियां हैं और दमनकारी माहौल में मतदान कराया जा रहा है। उनका कहना है कि ऐसे हालात में चुनावी नतीजे विश्वसनीय नहीं होंगे और सैन्य समर्थित पार्टी की संभावित जीत नागरिक शासन की वापसी का केवल एक भ्रम पैदा करेगी।