म्यांमार में सैनिक तख्ता पलट के दो साल पूरे होने मौके पर कई हलकों से देश में लगातार खराब हो रहीं आर्थिक और राजनीतिक स्थितियों की तरफ दुनिया का ध्यान गया है। विश्व बैंक ने बीते 30 जनवरी को जारी रिपोर्ट में यह बताया कि बीते दो साल में म्यांमार की अर्थव्यवस्था में 18 फीसदी की सिकुड़न आई है। इसके लिए सीधे तौर पर सैनिक शासन के कुप्रबंधन और तख्ता पलट के बाद म्यांमार पर लगाए गए पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों को जिम्मेदार ठहराया गया है।
म्यांमार की सेना ने एक फरवरी 2021 को नई सरकार बनाने जा रहे निर्वाचित जन प्रतिनिधियों को हिरासत में लेकर सत्ता पर कब्जा जमा लिया था। उसके बाद से गंभीर होती गई आर्थिक स्थितियों के बीच देश के लोगों को असाधारण महंगाई और जरूरी चीजों के अभाव का सामना करना पड़ा है। इस बीच कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां अपना कारोबार समेट कर म्यांमार से बाहर चली गई हैं। रिसर्च संस्था टोरिनो वर्ल्ड अफेयर्स इंस्टीट्यूट की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक फरवरी 2021 से दिसंबर 2022 के बीच 28 बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने या तो देश में अपना कारोबार पूरी तरह बंद कर दिया या उसे स्थगित कर रखा है।
यूनिर्सिटी ऑफ टोक्यो में स्थित रिसर्च सेंटर फॉर ससटेनेबल पीस एंड पॉलिसी में शोधकर्ता सैम बैरॉन ने एक विश्लेषण में लिखा है कि बड़ी कंपनियों के बाहर जाने के बाद उनसे खाली हुई जगह को भरने की कोई योजना सैनिक शासन के पास नहीं है। वेबसाइट एशिया टाइम पर छपे इस विश्लेषण में कहा गया है- सैनिक शासक इस वर्ष चुनाव कराने का एलान कर कारोबारियों में भरोसा पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। वे संदेश देना चाहते हैं कि देश में हालात सामान्य हैं लेकिन इसी बीच तख्ता पलट की दो साल पूरा होने के मौके पर सैनिक शासन ने देश में आपातकाल की अवधि छह महीनों के लिए बढ़ाने का एलान किया। जबकि उसने अगस्त में चुनाव कराने का कार्यक्रम घोषित कर रखा है। विश्लेषकों के मुताबिक आपातकाल की अवधि बढ़ाए जाने से चुनाव को लेकर संदेह गहरा गया है। इससे कारोबारियों का भरोसा बहाल करने की सैनिक सरकार की कोशिश में भी पलीता लग गया है।
विदेशों में कारोबार करने वाली जापानी कंपनियों के बीच हुए एक हालिया सर्वे में सामने आया कि लगभग 80 फीसदी कंपनियां म्यांमार में कारोबार करने को इच्छुक थीं। समझा जाता है कि ये कंपनियां वहां आम हालत बहाल होने के इंतजार में हैं लेकिन ताजा घटनाओं से ऐसी उम्मीदों को झटका लगा है। जापान म्यांमार में सबसे ज्यादा निवेश करने वाले देशों में रहा है। तख्ता पलट के पहले जापान की लगभग 400 कंपनियां म्यांमार में कारोबार चला रही थीं। भारत के भी म्यांमार से गहरे कारोबारी और अन्य संबंध रहे हैं। एशिया टाइम्स में छपे विश्लेषण में ध्यान दिलाया गया है कि भारत ने कुछ समय पहले म्यांमार में चुनाव कराने की हुई घोषणा का स्वागत किया था। लेकिन अब अगर सैनिक शासकों ने अपना यह वादा नहीं निभाया, तो चुनाव की उम्मीद लगाए सभी पक्षों को निराशा होगी। इससे म्यांमार की अंदरूनी स्थिति और बदतर हो जाएगी।