तहव्वुर हुसैन राणा (फाइल फोटो)
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मुंबई आतंकी हमलों के आरोपी तहव्वुर हुसैन राणा के वकील ने अमेरिकी अदालत में कहा कि इस बात का कोई संकेत नहीं है कि भारत ने हमलों के एक अन्य आरोपी डेविड कोलमैन हेडली के प्रत्यर्पण का अनुरोध करना बंद कर दिया है। राणा (69) हेडली के बचपन का मित्र है और भारत ने 2008 के मुंबई हमलों में उसकी संलिप्तता के कारण उसके प्रत्यर्पण का अनुरोध किया है।
बता दें कि मुंबई आतंकी हमले में छह अमेरिकियों समेत 166 लोगों की मौत हो गई थी। राणा को भारत में भगौड़ा घोषित किया जा चुका है जबकि वह खुद को भारत प्रत्यर्पित करने का विरोध कर रहा है। लॉस एंजिलिस में अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज जैकलीन केलोनियन के समक्ष इस सप्ताह की शुरुआत में दिए आवेदन में राणा के वकील ने अपने मुवक्किल को प्रत्यर्पित करने के अनुरोध का विरोध करते हुए दावा किया कि अभी तक इस बात का कोई संकेत नहीं मिला है कि भारत हेडली के प्रत्यर्पण का अनुरोध नहीं करने पर सहमत हो गया है। वकील ने अदालत को बताया कि भारत हेडली द्वारा अमेरिका को दी गई सहायता के एवज में उसके प्रत्यर्पण का अनुरोध करना बंद करने पर संभवत: सहमत हो गया होगा, लेकिन रिकॉर्ड में इस बात का कोई संकेत नहीं है।
भारतीय अभियोजकों का दिया हवाला
राणा के वकीलों ने कहा, सरकार के विशेषज्ञ के तौर पर सेवाएं दे रहे भारतीय अभियोजक के मुताबिक, मौजूदा राय विशेष रूप से भगौड़े तहव्वुर हुसैन राणा के प्रत्यर्पण के अनुरोध से जुड़ी है। इसे किसी भी तरह यह संकेत नहीं माना जाना चाहिए कि उपरोक्त मामले में आरोपी नंबर एक डेविड कोलमेन हेडली के प्रत्यर्पण के अनुरोध समेत विभिन्न संप्रभु देशों में लंबित प्रत्यर्पण के अनुरोध बंद कर दिए गए हैं।
जेल की सजा काट रहा है हेडली
मुंबई आतंकवादी हमलों की साजिश रचने में लश्कर-ए-तैयबा का पाकिस्तानी-अमेरिकी आतंकवादी हेडली शामिल था। उसे इस मामले में सरकारी गवाह बनाया गया था और वह हमले में अपनी भूमिका के लिए फिलहाल अमेरिका की जेल में 35 साल के कारावास की सजा काट रहा है। राणा ने अदालत में पेश किए गए अपने अभ्यावेदन में हेडली को झूठा बताया है।