मलयेशिया में पूर्व गृह मंत्री मोहिउद्दीन यासीन ने रविवार को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। मोहिउद्दीन यासीन ने कुआलालंपुर में देश के राजमहल में पद की शपथ ली। इसके साथ ही पूर्व सत्तारूढ़ गठबंधन के टूटने और महातिर के इस्तीफे के बाद एक सप्ताह से चल रहा राजनीतिक संकट खत्म हो गया।
दक्षिणपूर्वी एशियाई देश में सत्ता का संकट उस वक्त पैदा हुआ जब महातिर और अनवर इब्राहिम का सत्तारूढ़ पैक्ट ऑफ होप गठबंधन एक हफ्ते पहले टूट गया था। इस गठबंधन ने दो साल पहले नजीब रजाक की सरकार के खिलाफ ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। इसके बाद दुनिया के सबसे उम्रदराज नेता महातिर (94) ने इस्तीफा दे दिया था, जिससे प्रधानमंत्री पद के लिए दौड़ शुरू हुई जिसे यासीन ने जीत लिया। उनके गठबंधन में देश के जातीय मलय मुस्लिम बहुसंख्यक की संख्या अधिक है।
इससे पहले महातिर मोहम्मद ने शनिवार को इशारा दावा किया था कि वह पूर्व सत्तारूढ गठबंधन के साथ मिलेंगे जिसका नेतृत्व उन्होंने प्रतिद्वंद्वी अनवर इब्राहिम के साथ किया था। महातिर ने अपनी सरकार गिराने की नाकाम कोशिश के बाद सोमवार (24 फरवरी) को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। महातिर ने कहा कि उन्होंने अनवर के अलायंस ऑफ होप के नेताओं के साथ शनिवार को मुलाकात की और अब उन्हें विश्वास है कि प्रधानमंत्री के रूप में सत्ता में आने के लिए उनके पास पर्याप्त संख्या है।
मलयेशिया में जारी सियासी अस्थिरता के बीच रविवार को रिपोर्ट आई कि महातिर की पार्टी नई सरकार का गठन कर रही है जिसमें उनके द्वारा चुने गए उत्तराधिकारी अनवर इब्राहिम को शामिल नहीं किया जाएगा। जबकि 2018 में महातिर ने अनवर के साथ मिलकर सरकार बनाते वक्त कहा था कि वे कुछ साल बाद उन्हें सत्ता सौंप देंगे। रविवार को अनवर ने महातिर की पार्टी पर धोखेबाजी का आरोप लगाया था।