कश्मीर में अत्याचार का राग अलापने वाले पाकिस्तान के झूठ की कलई उसके यहां के राजनीतिक दल ही खोल रहे हैं। मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट (एमक्यूएम) की केंद्रीय समन्वय समिति का कहना है कि पाकिस्तान खुद कराची और सिंध प्रांत के अन्य शहरों में जुल्म ढा रहा है। यहां के हालात जम्मू-कश्मीर की स्थिति की उसके दावों की तुलना में कहीं ज्यादा भयावह हैं।
केंद्रीय समन्वय समिति के उप समन्वयक कासिम अली रजा और समिति के सदस्य मुस्तफा अजीजबादी, मंजूर अहमद और अरशद हुसैन ने कहा कि पाकिस्तान की संस्थाएं देश में बलूचों, मुहाजिरों, पश्तूनों, सिंधी और अन्य दबे कुचले लोगों के उत्पीड़न और यातना का आरोप लगा रहे हैं। यह अत्याचार बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। ये जुल्म कराची और अन्य शहरों में पाकिस्तान की राक्षसी सेना और अर्धसैनिक बलों द्वारा किया जा रहा है।
रजा ने कहा कि पाकिस्तान की ‘दुष्ट’ सेना ने अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर हजारों निर्दोष मुहाजिरों को मौत के घाट उतार दिया और सैकड़ों का उनके घरों से अपहरण कर लिया जिनका अभी तक पता नहीं लग सका है। पाकिस्तान की कोई भी सरकारी संस्थान मुहाजिरों और अन्य लोगों की आवाज को सुनने को तैयार नहीं है।
दुनिया के लोकतंत्रों से ले सकते हैं मदद
रजा ने कहा कि एमक्यूएम मुहाजिरों के नरसंहार, अन्याय और अत्याचार के खिलाफ दुनिया के लोकतंत्रों से भी मदद मांग सकता है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पाक के अत्याचार से परेशान लोग एक मंच के तले संयुक्त स्वतंत्रता आंदोलन भी छेड़ सकते हैं।
पाक भारत पर कैसे लगा सकता है आरोप: मुस्तफा
मुस्तफा ने कहा कि एमक्यूएम जम्मू और कश्मीर की स्थिति से चिंतित है लेकिन हकीकत यह है कि पाकिस्तानी सेना कराची और अन्य शहरों में अत्याचार कर रही है। ऐसे में आखिर वह किस मुंह से कश्मीर में अत्याचार के लिए भारत पर आरोप लगा सकता है? अरशद ने कहा कि खुद को बहादुर कहने वाली पाकिस्तानी सेना कश्मीर के मुद्दे पर हो-हल्ला मचा रही है लेकिन खुद पाकिस्तान में मुहाजिर, बलूच, पश्तून और अन्य दबे कुचले लोगों को सता रही है।