भारतीय वायु सेना (आईएएफ) और रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फोर्स ने 'भविष्य के एयरोस्पेस सहयोग' पर चर्चा की है। यह चर्चा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते रक्षा संबंधों के बीच हुई है, जहां फोटो सेशन के दौरान बोइंग एमक्यू-28 घोस्ट बैट लड़ाकू विमान भी पीछे दिखाई दिया।
दोनों वायु सेनाओं के बीच हाल ही में 12वीं एयर स्टाफ वार्ता कैनबरा में हुई। इस वार्ता का खास फोकस अभियान के समय तालमेल, एक-दूसरे की प्रणाली के साथ मिलकर काम करने की क्षमता (इंटरऑपरेबिलिटी), प्रशिक्षण, संयुक्त अभ्यास और भविष्य के एयरोस्पेस सहयोग पर था।
भारतीय वायु सेना ने बयान में क्या कहा?
आईएएफ के बयान में कहा गया कि 12वीं एयर स्टाफ वार्ता में दोनों वायु सेनाओं ने ऑपरेशनल तालमेल बढ़ाने, संयुक्त अभ्यास, एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग समझौते, प्रशिक्षण और भविष्य के एयरोस्पेस सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा की। दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय स्थिरता और क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करने और भविष्य के लिए तैयार हिंद-प्रशांत साझेदारी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई।
ऑस्ट्रेलियाई रक्षा मंत्रालय ने बताया कि वायु सेना के उप प्रमुख एयर वाइस मार्शल स्टीवन पेस ने कैनबरा और ब्रिस्बेन में भारतीय वायु सेना के एयर वाइस मार्शल संजीव तालियान की मेजबानी की। इस दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और पेशेवर वायु शक्ति संवाद को आगे बढ़ाया गया।
फोटो सेशन के दौरान दिखा एमक्यू-28 घोस्ट बैट
बैठक के दौरान ऑस्ट्रेलिया की ओर से जारी एक तस्वीर में बोइंग डिफेंस ऑस्ट्रेलिया का एमक्यू-28 घोस्ट बैट पीछे दिखाई दिया। यह एक मानव रहित लड़ाकू विमान है, जिसे इस तरह से बनाया गया है कि यह पायलट वाले लड़ाकू विमानों और हवाई प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के साथ मिलकर काम कर सके।
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एमक्यू-28 घोस्ट बैट क्यों खास है?
बोइंग के मुताबिक, यह एक 'फोर्स मल्टीप्लायर' है, यानी यह आधुनिक वायु शक्ति प्रणाली को और ज्यादा मजबूत बनाता है। इसकी खुली प्रणाली (ओपन सिस्टम) डिजाइन से मिशन में लचीलापन आता है। इसमें बाहर से अलग-अलग पेलोड लगाए जा सकते हैं और प्रणाली को जल्दी बदला और अपनी जरूरत के हिसाब से बनाया जा सकता है, जिससे मित्र देशों की सेनाएं जल्दी-जल्दी नई तकनीक अपना सकें और बदलते खतरों का जवाब दे सकें।
एमक्यू-28 की एक खासियत इसका टुकड़ों में बनने वाला (मॉड्यूलर) डिजाइन है, जिससे मिशन वाला आगे का हिस्सा (नोज सेक्शन) बदलकर उसमें अलग-अलग उपकरण तेजी से लगाए जा सकते हैं। बोइंग के अनुसार यह 2,000 नॉटिकल मील से ज्यादा दूरी तक उड़ान भर सकता है, मैक 0.9 तक की गति से उड़ सकता है और 40 हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर काम कर सकता है। ऑस्ट्रेलिया में पिछले आठ वर्षों में विकसित इस प्रणाली को बोइंग ने 'दुनिया का सबसे परिपक्व सहयोगी लड़ाकू विमान' बताया है।