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दिक्कत: कोरोना ने पर्वतारोहियों को भी किया 'कैद', कम ऑक्सीजन वाले तंबू में खुद को कर रहे तैयार

Fri, 21 May 2021 06:51 PM IST
प्रियंका तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू

सार

कुछ ही दिनों बाद पर्वतारोही माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई शुरू करने वाले हैं, लेकिन नेपाल में कोरोना महामारी अपने चरम पर है। इस कारण पर्वतारोहियों को चढ़ाई से पहले अभ्यास करने का मौका नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में एक पर्वतारोही आकाश नेगी ने अपने कमरे में एक कम ऑक्सीजन वाले तम्बू में कई सप्ताह बिताया और खुद को इस तरह से ढाला कि अब उनका शरीर कम ऑक्सीजन वाले वातावरण में भी ठीक महसूस कर सकता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोरोना वायरस के जोखिम के बीच इन दिनों कई पर्वतारोही चढ़ाई से पहले ऑक्सीजन की कमी वाले टेंट का उपयोग कर रहे हैं। माउंट एवरेस्ट के पर्वतारोही आमतौर पर काठमांडू से बेस कैंप तक 5,364 मीटर (17,598 फीट) की ट्रैकिंग करते हुए आठ दिन बिताते हैं। ऐसा करके वे अधिक ऊंचाई पर खुद को वहां की जलवायु के हिसाब से तैयार करते हैं व खुद को कम ऑक्सीजन में भी ठीक महसूस करने का अभ्यस्त बनाते हैं।

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दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वत पर चढ़ने के लिए न्यू जर्सी के रहने वाले पर्वतारोही आकाश नेगी भी पूरी तरह से तैयार हैं। दरअसल, आकाश ने अपने कमरे में एक कम ऑक्सीजन वाले तम्बू में कई सप्ताह बिताया और खुद को इस तरह से ढाला कि अब उनका शरीर कम ऑक्सीजन वाले वातावरण में भी ठीक महसूस कर सकता है। 

बता दें, आकाश की तरह ही कई पर्वतारोही हैं, जिन्हें नेपाल में भयंकर तरीके से फैले कोरोना महामारी के कारण पर्वत पर चढ़ाई की प्रैक्टिस करने का मौका नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में ये पर्वतारोही इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल करके घर पर ही रहकर प्रैक्टिस कर रहे हैं। इस साल अप्रैल में 30 से अधिक पर्वतारोहियों को चिकित्सा कारणों के चलते शिविर से पहले ही निकाला जा चुका है जिनमें से तीन कोरोना वायरस से संक्रमित थे।
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नेगी ने बेस कैंप के लिए हेलीकॉप्टर से उड़ान भरने से पहले कहा, ‘यात्रा के दौरान लोग एक साथ चाय के घरों में ठहरे हुए थे और अन्य टीमों से मिल रहे थे। ऐसे में यह कहना मुश्किल है कि ये लोग कहां संक्रमित हुए, लेकिन मुझे खुशी है कि मैं उस भीड़ से दूरी बनाने में सक्षम रहा।’

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