ब्रिटेन के रहने वाले निक होलिस (45) जब दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटी माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई कर रहे थे, तो वह मानसिक रूप से तैयार भी थे। उन्हें यहां रास्ते में इतने शव दिखे जितना उन्होंने सोचा भी नहीं था। कई ऐसे थे, जिन्हें देखकर लग रहा था कि इनकी मौत हाल ही में हुई है। निक दुनिया के उन 500 लोगों में शामिल हैं, जिन्होंने माउंट एवरेस्ट सहित दुनिया की सात चोटियां फतह की हैं।
माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई करने में निक को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। उन्हें रास्ते में धीमे और अनुभवहीन पर्वतारोही मिले। जो कि हर किसी के लिए खतरनाक है। निक का कहना है, "मैंने कभी उम्मीद नहीं की थी, कि मुझे इतने सारे शव दिखेंगे। इन लोगों में किसी की मौत उसी दिन हुई और किसी की एक दिन पहले। यह कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं है कि आप शवों के ऊपर चल रहे हैं।"
साल 1953 के बाद से एवरेस्ट पर 300 पर्वतारोहियों की मौत हुई है। अभी भी ये साफ नहीं है कि कितने शव अब भी पर्वत पर मौजूद हैं। नेपाल ने इस साल 381 परमिट जारी किए हैं। जिसमें प्रत्येक की कीमत 11 हजार डॉलर है। यही इस देश की कमाई का मुख्य जरिया भी है।
इन लोगों के अलावा शेपरा और गाइड भी होते हैं। इसका मतलब ये हुआ कि इस वक्त 800 लोग ऐसे हैं, जो माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई कर रहे हैं। 21 मई को चोटी पर पहुंचने वाले निक कहते हैं कि माउंट एवरेस्ट पर ट्रैफिक की स्थिति इसलिए है क्योंकि लोगों की संख्या अधिक है, साथ ही कुछ की सेहत भी ठीक नहीं थी। लेकिन सबसे बड़ी समस्या थी अत्यधिक अनुभवहीन पर्वतारोही। जो रास्ते के टेक्निकल सेक्शन पर काफी धीरे चल रहे थे, जिससे अड़चनें और लंबी देरी पैदा हो रही थी
उनका कहना है कि पर्वतारोहियों के पास चढ़ाई करने का बुनियादी कौशल नहीं है। उन्हें इतना भी नहीं पता कि चढ़ाई कैसे करते हैं। साथ ही ऑक्सीजन सप्लाई भी धीमी है, जिससे चढ़ाई में और अधिक देरी होती है।
हाल ही में चोटी पर पहुंचने वाले लोगों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। जिसके चलते यहां ट्रैफिक जाम जैसी स्थिति बन गई है। नेपाली साइड में मई महीने में 9 पर्वतारोहियों की मौत हुई और दो कि तिब्बती साइड में मौत हुई। 2015 के बाद से ये सबसे अधिक मौत का आंकड़ा है।