आखिर क्या-क्या निशाना बना?
द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन के हमले का मुख्य लक्ष्य मॉस्को की सबसे महत्वपूर्ण तेल रिफाइनरियों में से एक थी। यह रिफाइनरी राजधानी की पेट्रोल जरूरतों का लगभग 40 प्रतिशत और डीजल की करीब 50 प्रतिशत आपूर्ति करती है।
हमले में रिफाइनरी के ईंधन भंडारण टैंक को नुकसान पहुंचा। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि टैंक की छत हवा में उछल गई और कुछ ही मिनटों में पूरा हिस्सा आग की चपेट में आ गया। रूसी अधिकारियों के अनुसार हमले में एक ऊंची आवासीय इमारत, एक औद्योगिक परिसर और कई निजी मकान भी क्षतिग्रस्त हुए। कम से कम 17 लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई है।
रूस की सुरक्षा व्यवस्था को यूक्रेन ने कैसे भेदा?
मॉस्को रूस का सबसे सुरक्षित शहर माना जाता है। राजधानी के चारों ओर देश का सबसे घना एयर डिफेंस नेटवर्क तैनात है और आमतौर पर यूक्रेन के ज्यादातर ड्रोन शहर तक पहुंचने से पहले ही मार गिराए जाते हैं। लेकिन इस बार हमला अलग था। विशेषज्ञों का मानना है कि करीब 200 ड्रोन की संख्या ने रूसी एयर डिफेंस सिस्टम पर दबाव बढ़ा दिया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में कई ड्रोन मॉस्को के ऊपर उड़ते दिखाई दिए, जिससे संकेत मिलता है कि कुछ ड्रोन बहुस्तरीय सुरक्षा घेरा पार करने में सफल रहे। एक वीडियो में रूसी सैनिक को कंधे पर रखकर दागी जाने वाली मैनपैड्स मिसाइल प्रणाली से ड्रोन को गिराने की कोशिश करते देखा गया। हालांकि, ड्रोन रिफाइनरी तक पहुंच गया और वहां विस्फोट हुआ।
क्या यूक्रेन ने नए हथियारों का इस्तेमाल किया?
- इस हमले की सबसे खास बात यह रही कि यूक्रेन ने केवल पारंपरिक लंबी दूरी के ड्रोन का इस्तेमाल नहीं किया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यूक्रेन ने जेट इंजन से लैस मिसाइल-ड्रोन भी इस्तेमाल किए।
- इनमें "बार्स" (Bars) नाम का हाइब्रिड ड्रोन-क्रूज मिसाइल सिस्टम शामिल था, जिसे यूक्रेन ने 2024 के अंत और 2025 की शुरुआत में सार्वजनिक रूप से पेश किया था।
- ये ड्रोन सामान्य प्रोपेलर वाले ड्रोन की तुलना में कहीं ज्यादा तेज उड़ते हैं और इन्हें रोकना भी कठिन होता है। यही वजह है कि रूस की वायु रक्षा प्रणाली के लिए ये नई चुनौती बनकर उभरे हैं।
रूस के लिए ड्रोन रोकना इतना मुश्किल क्यों है?
विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी एयर डिफेंस सिस्टम के लिए सैकड़ों हाई-टेक ड्रोन को एक साथ रोकना आसान नहीं होता।मॉस्को जैसे घनी आबादी वाले शहर में एक और समस्या है। अगर इंटरसेप्टर मिसाइल लक्ष्य से चूक जाए या नष्ट किए गए ड्रोन का मलबा नीचे गिरे, तो बड़ी संख्या में नागरिक हताहत हो सकते हैं। यानी रूस के सामने दोहरी चुनौती है ड्रोन को गिराना भी है और नागरिकों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी है।
इस हमले का सबसे बड़ा असर क्या होगा?
द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन का उद्देश्य सिर्फ भौतिक नुकसान पहुंचाना नहीं है। वह चाहता है कि रूस के आम नागरिक भी युद्ध के प्रभाव को महसूस करें। अगर रिफाइनरी को गंभीर नुकसान हुआ है तो इससे ईंधन आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इससे पहले भी रूस और रूस के कब्जे वाले क्रीमिया क्षेत्र में ईंधन संकट देखने को मिला था, जहां लोगों को पेट्रोल पंपों पर घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ा था।
हालांकि, अंतिम प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि रिफाइनरी को कितना नुकसान पहुंचा है, रूस दूसरे क्षेत्रों से ईंधन आपूर्ति कितनी तेजी से बढ़ा सकता है और यूक्रेन भविष्य में ऐसे हमले कितनी बार दोहरा पाता है।
मनोवैज्ञानिक प्रभाव कहीं ज्यादा बड़ा
द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार, सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस हमले का सबसे बड़ा असर मनोवैज्ञानिक हो सकता है। रूस के पूर्ण पैमाने पर आक्रमण शुरू होने के बाद पहली बार मॉस्को के लाखों लोगों ने अपनी खिड़कियों से राजधानी के ऊपर उठता धुआं देखा। सोशल मीडिया पर कई वीडियो सामने आए जिनमें लोग घबराए हुए दिखाई दिए। एक वीडियो में एक महिला रोते हुए कहती है, "युद्ध शुरू हो गया है। मेरी खिड़कियां कांप रही हैं। हवा धुएं से भर गई है।"
मॉस्को के पास स्थित बालाशिखा शहर के निवासियों ने "काली बारिश" होने की बात कही। लोगों ने सड़कों, इमारतों और कारों पर तेल जैसे काले अवशेषों की तस्वीरें साझा कीं। एक स्थानीय निवासी ने बीबीसी को बताया कि सुबह उसका पूरा भवन कांपने लगा था और जागने के बाद उसे जले हुए पदार्थ की गंध महसूस हुई। उसने कहा, "पहले मैं इतना नहीं डरता था, लेकिन अब लगभग घबराहट होने लगी है।"
जेलेंस्की ने हमले को कैसे सही ठहराया?
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि मॉस्को पर हमला कीव के ऐतिहासिक पेचेर्स्क लावरा परिसर पर हुए रूसी हमलों का जवाब था। हालांकि, रूस ने इस मठ को निशाना बनाने से इनकार किया है। जेलेंस्की ने कहा कि रूस के युद्ध तंत्र को चलाने वाली सुविधाओं को निशाना बनाना पूरी तरह उचित प्रतिक्रिया है। उन्होंने यह भी कहा कि अब रूस को कूटनीतिक रास्ता अपनाकर युद्ध समाप्त करने की दिशा में कदम बढ़ाने चाहिए। यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने भी मॉस्कोवासियों को संबोधित करते हुए कहा, "आप पूछ रहे हैं कि क्या हो रहा है? जवाब यह है कि आपके देश ने हमारे खिलाफ युद्ध शुरू किया था।"
ट्रंप की कोशिश हो रही नाकाम
ट्रंप लगातार युद्ध समाप्त कराने की कोशिशों का दावा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में उनकी बात जेलेंस्की और पुतिन दोनों से हुई है और दोनों देशों ने भारी जनहानि झेली है।
उन्होंने विक्ट्री डे पर में तीन दिन के सीजफायर और कैदियों की अदला-बदली पर सहमति का दावा किया था। लेकिन मॉस्को पर हुए इस बड़े हमले और उसी रात यूक्रेन पर रूस द्वारा 200 से अधिक ड्रोन और कई बैलिस्टिक मिसाइलों से किए गए हमलों ने दिखा दिया कि युद्धविराम की उम्मीदों के बावजूद दोनों पक्ष अभी भी एक-दूसरे पर लगातार हमले कर रहे हैं।
अब पुतिन क्या कर सकते हैं?
हमले के समय पुतिन कजान में एशियाई नेताओं के साथ एक शिखर सम्मेलन में शामिल थे। उन्होंने तत्काल कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी। हालांकि रूसी राष्ट्रवादी खेमे ने तुरंत जवाबी कार्रवाई की मांग शुरू कर दी। कई प्रभावशाली राष्ट्रवादी नेताओं ने यूक्रेन के खिलाफ और कड़े सैन्य कदम उठाने की मांग की, जबकि कुछ ने परमाणु हथियारों के इस्तेमाल तक की बात कही।
जेलेंस्की ने दी पुतिन को चेतावनी
कीव पोस्ट के अनुसार जेलेंस्की ने शुक्रवार को चेतावनी दी कि रूसी राष्ट्रपति आने वाले समय में यूक्रेन पर मिसाइल और ड्रोन हमले और तेज कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि पुतिन राजनीतिक, सैन्य और शारीरिक रूप से कमजोर पड़ रहे हैं, इसलिए वह यूक्रेन के खिलाफ हमलों की तीव्रता बढ़ा सकते हैं।
पत्रकारों से बातचीत में जेलेंस्की ने यूक्रेनी नागरिकों से एयर रेड अलर्ट को गंभीरता से लेने और हमले की स्थिति में सुरक्षित शेल्टर का इस्तेमाल करने की अपील की। उन्होंने कहा, "पुतिन कमजोर हो रहे हैं। वह राजनीतिक रूप से, युद्ध के मैदान में और शारीरिक रूप से कमजोर पड़ रहे हैं। यही वजह है कि वह हमारे लोगों पर मिसाइल और ड्रोन हमले बढ़ा सकते हैं।"
जेलेंस्की ने दावा किया कि यूक्रेन के सहयोगी देश अब यह समझने लगे हैं कि रूस वास्तव में युद्ध समाप्त नहीं करना चाहता। उनके मुताबिक, क्रेमलिन शांति की बात तो करता है, लेकिन जमीनी स्तर पर सैन्य कार्रवाई को लगातार बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि रूस के इरादों को लेकर यूक्रेन के साझेदार देशों के बीच अब भ्रम की स्थिति नहीं है।
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि उनका देश शांति स्थापित करने के उद्देश्य से बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए रूस को भी गंभीरता दिखानी होगी।
जेलेंस्की ने कहा कि यूरोपीय संघ भी रूस के खिलाफ नए प्रतिबंधों की तैयारी कर रहा है। उन्होंने यूरोपीय देशों से यूक्रेन को आर्थिक और राजनीतिक समर्थन बढ़ाने, रूस पर बिना किसी अपवाद के कड़े प्रतिबंध लगाने और यूक्रेन के लिए वित्तीय सहायता जारी रखने की अपील की।