मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने साख रेटिंग को गिरा कर पाकिस्तान की मुसीबत और बढ़ा दी है। मूडीज ने पाकिस्तान की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग को बी-3 से गिरा कर सीएए-1 कर दिया है। उसने कहा है कि हाल में आई भीषण बाढ़ के बाद पाकिस्तान की विदेशी वित्तीय जरूरतें बढ़ गई हैं, जिससे भुगतान संतुलन का उसका संकट और गहराने का जोखिम पैदा हुआ है। विश्लेषकों का कहना है कि मूडीज के इस फैसले से पाकिस्तान के लिए विदेशी ऋण प्राप्त करना और मुश्किल हो जाएगा।
पाकिस्तान के लिए खास चिंता का विषय उसे दिए गए कर्ज की सुरक्षा के बारे में मूडीज का आकलन है। मूडीज ने कहा है कि बढ़ रही ब्याज दर और कमजोर हो रही राजस्व उगाही की वजह से पाकिस्तान के लिए समय पर ऋण भुगतान करना और मुश्किल होता जा रहा है। उसने ध्यान दिलाया है कि सरकार के राजस्व का अब अधिक हिस्सा ब्याज चुकाने में खर्च हो रहा है। इसके बीच अपनी आबादी की जरूरतों को पूरा करते हुए ऋण के मूलधन को चुकाना उसके लिए और भी ज्यादा कठिन हो गया है।
पाकिस्तान सरकार की प्रतिक्रिया से यह साफ है कि मूडीज के फैसले से उसे सदमा पहुंचा है। इस निर्णय से होने वाली दिक्कतों का उसे अहसास है। इसीलिए क्रेडिट रेटिंग में गिरावट की खबर के कुछ ही समय बाद वित्त मंत्रालय ने कड़े शब्दों में एक बयान जारी किया। इसमें कहा गया कि रेटिंग एजेंसी ने बिना उससे या पाकिस्तान के सेंट्रल बैंक- स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान- से राय-मशविरा किए ये घोषणा कर दी। वित्त मंत्रालय ने दावा किया है कि बीते कुछ महीनों में सरकार की तरफ से उठाए गए कदमों के कारण राजकोषीय स्थिति सुधरी है।
मूडीज के एलान के तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय निजी संस्थानों ने पाकिस्तान के जो बॉन्ड खरीदे हैं, उनके मुल्य में तुरंत गिरावट आई। अमेरिकी थिंक टैंक अटलांटिक काउंसिल में एशिया सेंटर के निदेशक उजैर यूनुस ने बताया कि पाकिस्तान के यूरोबॉन्ड्स के मूल्य में 50 से लेकर एक अंक तक की गिरावट आई है। यूनुस के मुताबिक फिलहाल पाकिस्तान के यूरोबॉन्ड बाजार में श्रीलंका के यूरोबॉन्ड्स से 10 से 12 अंक ऊपर के मूल्य पर ही बिक रहे हैं, जबकि श्रीलंका खुद को डिफॉल्टर (कर्ज चुकाने में अक्षम) घोषित कर चुका है।
पाकिस्तान को लगे ताजा वित्तीय झटके से विपक्षी दल पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) को सरकार को घेरने का एक नया मौका मिला है। पीटीआई के नेता असद उमर ने कहा है कि जिस समय शहबाज शरीफ सरकार अपने विरोधियों को गिरफ्तार करवाने में जुटी हुई है, देश गर्त में जा रहा है। इमरान खान के नेतृत्व वाली पूर्व पीटीआई सरकार में वित्त मंत्री रहे शौकत तरीन ने ध्यान दिलाया कि पीटीआई की सरकार गिरने के बाद से मूडीज देश की क्रेडिट रेटिंग को दो बार गिरा चुका है।
निष्पक्ष विश्लेषक भी इस बात से सहमत हैं कि दुनिया भर में बढ़ रहे ब्याज दरों के बीच पाकिस्तान के लिए कर्ज चुकाना लगातार कठिन होता जा रहा है। ऐसे में उसके कर्ज की सुरक्षा को लेकर बढ़ रही चिंता निराधार नहीं है।