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मोल्दोवा संसदीय चुनाव: यूरोपीय संघ समर्थक पार्टी पीएएस को मिला स्पष्ट बहुमत, रूस के करीबी दलों को झटका

Mon, 29 Sep 2025 12:51 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, चिसीनाउ।

सार

मोल्दोवा की यूरोपीय संघ समर्थक पार्टी 'पीएएस' ने संसदीय चुनाव में स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। पीएएस ने 101 सीटों में से करीब 55 सीटें जीती हैं, जिससे उसे बिना गठबंधन सरकार बनाने का मौका मिलेगा। चुनाव के दौरान कई तनावपूर्ण घटनाएं हुईं, लेकिन इससे पता चलता है कि मोल्दोवा की जनता यूरोपीय संघ की सदस्यता की दिशा में बढ़ना चाहती है।
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मोल्दोवा चुनाव परिणाम - फोटो : एक्स/ईयू मेड सिंपल
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विस्तार
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मोल्दोवा की यूरोपीय संघ (ईयू) समर्थक पार्टी ने संसदीय चुनाव स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। इस चुनाव को रूस और पश्चिम देशों के बीच एक बड़े भू-राजनीतिक निर्णय के रूप में देखा जा रहा था। चुनाव आयोग को सभी मतदान केंद्रों से मिले आंकड़ों को मुताबिक, ईयू समर्थक 'पार्टी ऑफ एकशन एंड सॉलिडैरिटी' (पीएएस) को 50.1 फीसदी वोट मिले हैं, जबकि रूस के करीब माने जाने वाले 'अल्टरनेटिवा ब्लॉक' को तीसरा स्थान मिला। 'आवर पार्टी' और 'डेमोक्रेसी एट होम' पार्टी को भी संसद में प्रवेश के लिए जरूरी वोट मिले हैं। 
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इस बार चुनाव में पीएएस को रूस समर्थक कई विरोधी दलों से मुकाबला करना पड़ा। हालांकि, उसके पास कोई मजबूत यूरोप समर्थक गठबंधन सहयोगी नहीं था। फिर भी पीएएस ने संसद की 101 सीटों में से करीब 55 सीटें जीत ली हैं। इससे पार्टी को किसी गठबंधन की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह चुनाव मोल्दोवा के लिए केवल घरेलू राजनीति नहीं, बल्कि विदेश नीति तय करने वाला माना जा रहा था। यानी देश या तो ईयू में शामिल होने की दिशा में आगे बढ़े या फिर रूस के प्रभाव में वापस लौटे।

अमेरिका के ओकलैंड विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय संबंधों के प्रोफेसर क्रिस्टियन कैंटिर ने एसोसिएटेड प्रेस से कहा, यह जीत माल्दोवा में यूरोप समर्थक ताकतों की बड़ी कामयाबी है। अब पार्टी बिना गठबंधन के अगले कुछ वर्षों तक सुधारों और ईयू की सदस्यता की दिशा में लगातार काम कर सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि मोल्दोवा अब भी रूस के दबाव वाले भू-राजनीतिक माहौल में रहेगा, जहा मॉस्को उसे अपने प्रभाव में लाने की कोशिश करेगा। 
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रविवार को हुए मतदान में दोपहर में माहौल काफी तनावपूर्ण रहा। कई तरह की घटनाएं सामने आईं। विदेश में स्थित कई मतदान केंद्रों को बम से उड़ाने की धमकियां सामने आईं। मोल्दोवा की सरकारी वेबसाइट और चुनाव प्रणाली पर साइबर हमले हुए। कुछ मतदाताओं को अवैध रूप से मतदान केंद्र तक लाया गया। जबकि कुछ लोग अपने मतपत्र की तस्वीरें खींचते नजर आए। चुनाव के बाद हिंसा भड़काने की साजिश के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इस सबके बावजूद पीएएस को स्पष्ट बहुमत मिलने से संकेत मिलता है कि मोल्दोवा की जनता यूरोपीय संघ की सदस्यता की ओर बढ़ना चाहती है, भले ही रूस की ओर से दबाव और दखल क्यों न हो।   



 
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