पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई की स्थिति को लेकर रहस्य गहरा गया है। रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि हवाई हमले में घायल होने के बाद वह गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हैं। बताया जा रहा है कि वह कोमा में हैं और उनके शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और युद्ध के माहौल के बीच ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई को लेकर कई तरह की खबरें सामने आ रही हैं। रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि हाल ही में हुए एक हवाई हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। बताया जा रहा है कि उनकी हालत काफी नाजुक है और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हालांकि ईरान की सरकार ने इस बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
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बताया जा रहा है कि 56 वर्षीय मोजतबा खामेनेई को राजधानी तेहरान के सिना यूनिवर्सिटी अस्पताल के आईसीयू में रखा गया है। रिपोर्टों में कहा गया है कि हमले में उन्हें गंभीर चोटें आई हैं और उनके शरीर को भारी नुकसान पहुंचा है। अस्पताल के आसपास सुरक्षा बेहद कड़ी कर दी गई है और वहां केवल कुछ चुनिंदा लोगों को ही जाने की अनुमति दी जा रही है।
क्या हवाई हमले में गंभीर रूप से घायल हुए मोजतबा खामेनेई?
सूत्रों के अनुसार हवाई हमले में मोजतबा खामेनेई को गंभीर चोटें आई हैं। बताया जा रहा है कि उनके शरीर के कई हिस्सों को नुकसान पहुंचा है और उनकी हालत बेहद गंभीर बनी हुई है। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि मोजतबा कोमा में हैं और डॉक्टरों की एक विशेष टीम उनका इलाज कर रही है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है।
अस्पताल में इलाज और सुरक्षा व्यवस्था कैसी है?
रिपोर्टों के अनुसार मोजतबा खामेनेई का इलाज तेहरान के सिना यूनिवर्सिटी अस्पताल में चल रहा है। अस्पताल के एक हिस्से को पूरी तरह से सील कर दिया गया है और वहां भारी सुरक्षा तैनात की गई है। बताया जा रहा है कि केवल सीमित लोगों को ही आईसीयू तक पहुंचने की अनुमति दी जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां अस्पताल परिसर की लगातार निगरानी कर रही हैं।
क्या ईरान की सत्ता अब सैन्य कमांडरों के हाथ में है?
विश्लेषकों का कहना है कि अगर मोजतबा खामेनेई सक्रिय रूप से नेतृत्व नहीं कर पा रहे हैं तो देश की सैन्य और राजनीतिक व्यवस्था अब बड़े पैमाने पर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी के कमांडरों के हाथ में जा सकती है। बताया जा रहा है कि पहले से बनाए गए क्षेत्रीय सैन्य कमांड सेंटर अब युद्ध की रणनीति चला रहे हैं।