उत्तर प्रदेश के रहने वाले एक व्यक्ति को उसका परिवार लापता मान रहा था, लेकिन वह अबु धाबी की जेल में बंद है। उसपर आरोप है कि वह वीजा की अवधि खत्म होने के बाद भी यहां रह रहा था। वासी अहमद एक एजेंट की सहायता से 9 फरवरी को एक महीने के टूरिस्ट वीजा पर दुबई आए थे।
एजेंट ने अहमद को वादा किया था कि उनके दुबई आने और 4220 दिरहम (1,140 डॉलर) देने के बाद वह उन्हें रोजगार वीजा उपलब्ध करवाएगा। लेकिन उसने ऐसा नहीं किया, साथ ही उसने अहमद को वहां दो महीने और ठहरने को मजबूर किया।
दो महीने तक अवैध रूप से रहने के बाद अहमद को नौकरी तो मिल गई लेकिन उनका वीजा खत्म हो चुका था। भारतीय दूतावास के सामुदायिक मामलों की प्रथम सचिव पूजा वरनेकर ने बताया, "वह (वासी अहमद) अधिक समय तक ठहरने को लेकर फिलहाल जेल में हैं। इस तरह के मामलों में हम केस पुलिस के पास भेज देते हैं।"
अहमद को जहां नौकरी मिली, वहां उनसे कहा गया कि उनके एजेंट ने उनके साथ धोखा किया है। उन्हें अधिक समय तक अवैध रूप से ठहरने पर जुर्माना भरना होगा। जब वह दूतावास गए तो वहां से उन्हें पुलिस स्टेशन ले जाया गया। वहां वह जुर्माना नहीं भर सके, जिसके बाद उन्हें जेल में डाल दिया गया।
वरनेकर ने आगे बताया, "सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद हम अधिकारियों को सूचना देंगे। फिर उन्हें एक हवाई टिकट देंगे।" उन्होंने बताया कि अहमद को वाणिज्य दूतावास की ओर से वित्तीय सहायता मुहैया कराई जा रही है।
वरनेकर ने भारतीयों को सलाह भी दी है कि अगर वह काम की तलाश में संयुक्त अरब अमीरात जाते हैं तो रोजगार वीजा के साथ ही आएं। नौकरी के लिए पर्यटन वीजा पर ना आएं।