पाकिस्तान में कट्टरपंथियों पर कोई लगाम नहीं हैं, वे तब चाहें किसी भी समुदाय को निशाना बनाते हैं और उनकी धार्मिक आस्था से लेकर परिवार तक हमला करते हैं। किसी से छिपा नहीं है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर किस तरह से अत्याचार हो रहा है। इन दिनों लगातार पाकिस्तान में अहमदी समुदाय और उसकी मस्जिदों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। पहले पंजाब प्रांत में तो अब कराची में अज्ञात लोगों ने अहमदी समुदाय के एक पूजा पर हमला कर दिया और उसकी मीनारों को नष्ट कर दिया।
अहमदी समुदाय के एक प्रवक्ता अमीर महमोद ने जानकारी दी कि यह घटना सोमवार को कराची में हुई। सोमवार शाम को लगभग एक दर्जन लोग जबरन पूजा स्थल में घुस गए और मीनारों को हथौड़ों से नष्ट कर दिया और दीवारों पर भी हथौड़े चलाए। उन्होंने बताया कि यह पहली बार नहीं है जब कराची में अहमदी मस्जिद पर हमला किया गया है। दो महीने पहले, सदर और मार्टिन क्वार्टर इलाकों में हमारे अहमदी समुदाय के दो मस्जिदों में भी तोड़फोड़ की गई थी।
पुलिस सुरक्षा देने में विफल
पंजाब प्रांत में तो कट्टरपंथी ने पुलिस को चुनौती दी थी कि अगर अहमदी मस्जिद नहीं तोड़ी गई तो हम इस पर हमला कर देंगे और नष्ट कर देंगे। इसके पुलिस ने दबाव में आकर अहमदी मस्जिद को गिरा दिया था। अहमदी समुदाय के एक प्रवक्ता ने कहा कि यह मस्जिद काफी पुरानी है जब पाकिस्तान बना उस समय की है। सरकार अहमदी पूजा स्थलों को सुरक्षा प्रदान करने में पूरी तरह से विफल रही है।
उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है हम पुलिस में शिकायत नहीं करते, हम करते हैं और पुलिस एफआईआर दर्ज भी करती है, लेकिन दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती। वहीं वरिष्ठ पुलिस अधिकारी तारिक नवाज ने कहा कि पुलिस को ड्रिघ रोड पर अहमदियों के एक पूजा स्थल में तोड़फोड़ किए जाने की शिकायत मिली है और प्राथमिकी दर्ज करने से पहले मामले की जांच की जा रही है।
कट्टरपंथी खुलेआम लगा रहे पोस्टर
समुदाय के प्रवक्ता अमीर महमोद ने कहा कि तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) ने खुले तौर पर अहमदियों के पूजा स्थलों की मीनारों को नष्ट करने के अभियान का प्रचार किया। उन्होंने कहा कि टीएलपी के पोस्टर और बैनर, इन पूजा स्थलों पर मीनारों को ध्वस्त करने का आह्वान करते हुए पंजाब प्रांत में खुले तौर पर दिखाई दिए हैं। उन्होंने कहा, पिछले हफ्ते, टीएलपी कार्यकर्ताओं ने पंजाब प्रांत के झेलम में एक अहमदी पूजा स्थल की मीनारों को नष्ट कर दिया और पुलिस देखती रही।
बता दें कि पाकिस्तान में अहमदियों को आमतौर पर कादियानी कहा जाता है, जो उनके लिए अपमानजनक शब्द माना जाता है। 1974 में पाकिस्तान की संसद ने अहमदी समुदाय को गैर-मुस्लिम घोषित कर दिया था। एक दशक बाद, उन पर खुद को मुस्लिम कहने पर प्रतिबंध लगा दिया गया। वहीं उन पर उपदेश देने और तीर्थयात्रा के लिए सऊदी अरब जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। हालाँकि पाकिस्तान में अहमदियों की संख्या लगभग दस लाख है, लेकिन अनौपचारिक आंकड़े उनकी आबादी को कहीं अधिक बताते हैं।
पाक मस्जिद में आत्मघाती हमले में पुलिस अधिकारी की मौत
पाकिस्तान में एक ऐतिहासिक मस्जिद में मंगलवार को हुए आत्मघाती विस्फोट में एक पुलिस अधिकारी की मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि पेशावर की सीमा से लगे आदिवासी जमरूद तहसील में अली मस्जिद (मस्जिद) में हुए विस्फोट में अतिरिक्त एसएचओ अदनान अफरीदी की मौत हो गई।
खैबर पख्तूनख्वा के पुलिस महानिरीक्षक अख्तर हयात खान गंडापुर ने कहा कि यह एक आत्मघाती विस्फोट था। मस्जिद में घुसने से पहले सुरक्षा जांच के दौरान हमलावर ने खुद को उड़ा लिया। पुलिस ने बताया कि विस्फोट के बाद हमलावर का एक साथी मौके से भाग गया जबकि एक संदिग्ध को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया है।