ईरान और अमेरिका के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। रविवार सुबह ईरानी सेना ने बंदर अब्बास के ऊपर उड़ रहे एक अमेरिकी 'लुकास' ड्रोन को मार गिराने का दावा किया। ईरान की मेहर समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी सेना की वायु रक्षा इकाइयों ने रविवार सुबह बंदर अब्बास के ऊपर उड़ रहे एक अमेरिकी 'लुकास' ड्रोन को मार गिराया।
अमेरिकी सेना के लुकास ड्रोन नष्ट
इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी (आईआरएनए) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पोस्ट में घटना की जानकारी देते हुए बताया कि ईरान की सेना की वायु रक्षा इकाइयों ने बंदर अब्बास के ऊपर आसमान में हमलावर अमेरिकी सेना के एक 'लुकास' ड्रोन को नष्ट कर दिया। सेना के जनसंपर्क कार्यालय ने बताया कि देश की एकीकृत वायु रक्षा प्रणाली के तहत काम कर रही वायु रक्षा इकाइयों ने बंदर अब्बास के आसमान में मौजूद अमेरिकी 'लुकास' ड्रोन को नष्ट कर दिया।
20 अक्टूबर को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की वायु रक्षा प्रणाली ने होर्मुज स्ट्रेट के ऊपर एक अमेरिकी एमक्यू-9 ड्रोन को रोककर मार गिराया था। आईआरजीसी के अनुसार, यह ऐसा 54वां ड्रोन था, जिसे गिराया गया। आईआरजीसी ने अपने बयान में बताया कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की ओर से शुरू किए गए सैन्य अभियान के बाद से ईरान की सशस्त्र सेनाओं ने दर्जनों जासूसी और लड़ाकू ड्रोन, साथ ही अन्य दुश्मन विमानों को भी मार गिराया है।
आईआरजीसी का कहना है कि ये कार्रवाइयां ऐसे संघर्ष के दौरान की गई हैं, जिसे वह संयुक्त राष्ट्र (यूएन) चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन मानता है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों और तनाव को लेकर लगातार नजर रखी जा रही है।
यमन में फिर बढ़ा तनाव, हूती विद्रोहियों और सऊदी के बीच मिसाइल, ड्रोन और हवाई हमलें
यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन के बीच संघर्ष एक बार फिर तेज हो गया है। हूती समूह ने दावा किया है कि उसने सऊदी अरब के कई शहरों में मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जबकि जवाब में गठबंधन ने यमन के हूती नियंत्रण वाले इलाकों पर भारी हवाई हमले किए, जिनमें कई लोगों की मौत और घायल होने की खबर है।
हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारेया ने बयान जारी कर कहा कि शनिवार को समूह ने सात मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इन हमलों का निशाना सऊदी अरब के रियाद, यनबू, राबिग, दम्माम, नज्रान और खमीस मुशैत शहरों के हवाई अड्डे, तेल प्रतिष्ठान और सैन्य ठिकाने थे।सारेया ने कहा कि रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को दो चरणों में निशाना बनाया गया। इसके अलावा यनबू में सऊदी अरामको की सुविधाओं और दम्माम के किंग फहद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भी हमले किए गए।दूसरी तरफ, सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने कहा कि उसने हूती समूह की ओर से रियाद, ताइफ और यनबू की ओर दागी गई कई मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया। साथ ही पूर्वी प्रांत में एक ड्रोन को भी मार गिराया गया।
सऊदी अरब के नागरिक सुरक्षा विभाग ने बताया कि दो इंटरसेप्ट की गई मिसाइलों का मलबा मक्का और मदीना क्षेत्रों में गिरा। हालांकि हूती समूह ने इन दोनों पवित्र शहरों को निशाना बनाने के आरोपों से इनकार किया और उन्हें 'झूठा और बेबुनियाद' बताया।हूती समूह का कहना है कि ये हमले पिछले 24 घंटों में उनके नियंत्रण वाले इलाकों पर किए गए लगभग 100 सऊदी हवाई हमलों के जवाब में किए गए। इनमें राजधानी सना और ताइज प्रांत के लाल सागर तट पर स्थित मोचा शहर भी शामिल थे।
हवाई हमले में आठ लोगों की मौत
हूती समूहों की ओर से संचालित अल-मसीरा टीवी के अनुसार, इन हवाई हमलों में कई लोग हताहत हुए। सना प्रांत के हमदान जिले में एक सीमेंट फैक्ट्री के कर्मचारियों के आवास पर हुए हवाई हमले में आठ लोगों की मौत हो गई, जबकि 10 से अधिक लोग घायल हुए।ये हमले ऐसे समय में हुए हैं जब सऊदी समर्थन प्राप्त यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार की सेना हूतियों के खिलाफ 'डॉन ऑफ यमन' अभियान को तेज कर रही है। इसके जवाब में हूती लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहे हैं।
एक अलग बयान में याह्या सारेया ने कहा कि हूती बलों ने दक्षिणी बंदरगाह शहर अदन में सऊदी समर्थित सैन्य जमावड़ों को निशाना बनाया। अदन फिलहाल यमन सरकार का मुख्य ठिकाना है।एक स्थानीय सुरक्षा अधिकारी ने समाचार एजेंसी सिन्हुआ को बताया कि हूतियों ने शहर पर करीब चार बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इनमें से कुछ मिसाइलें अदन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और खोरमक्सर जिले की महत्वपूर्ण सैन्य सुविधाओं के पास गिरीं, जबकि एक मिसाइल अल-तवाही जिले में कोस्ट गार्ड मुख्यालय पर लगी।
इस बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी विदेश विभाग ने शनिवार को मध्य पूर्व के कई देशों के लिए अपनी यात्रा सलाह (ट्रैवल एडवाइजरी) अपडेट की। इनमें सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, इराक, लेबनान और इजरायल शामिल हैं। विभाग ने हूती हमलों के खतरे को देखते हुए यह कदम उठाया।
यमन में संघर्ष 2014 के अंत से जारी है, जब हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना और देश के उत्तरी हिस्सों के बड़े क्षेत्र पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाला गठबंधन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार के समर्थन में युद्ध में शामिल हुआ।